मुद्रा स्फीति एवं उसके प्रकार

मुद्रा स्फीति मुद्रा स्फीति की धारणा एक सामान्य प्राकृतिक धारणा है जिसकी चर्चा प्रायाः सभी आर्थिक तथा राजनीतिक चर्चाओं में होती है। स्फीति वह स्थिति है जिसमें मुद्रा का मूल्य गिर रहा हो अर्थात वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हों। मुद्रा स्फीति का यह एक सामान्य लक्षण है कि मूल्य स्तर में वृद्धि होगी और

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औद्योगिक अर्थव्यवस्था (Industrial Economy)

औद्योगिक अर्थव्यवस्था (Industrial Economy) इसको तीन भागों में बांट सकते हैं- 1. भारी एवं आघारभूत उद्योग 2. मध्यम आकार के उद्योग 3. लघु एवं कुटीर उद्योग (सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम) वर्ष 2006 के बाद लघु एवं कुटीर उद्योगों को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम के नाम से जाना जाता है। उद्योग किसी अर्थव्यवस्था को

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विनिमय दर

विनिमय दर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के अन्तर्गत अलग-अलग देशों में अलग-अलग मुद्रायें प्रचलित रहती हैं और अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार प्रारम्भ करने से पूर्व यह समस्या होती है कि मुद्राओं के बीच विनिमय दर का निर्धारण कैसे किया जाय। किसी मुद्रा की कीमत को अन्य मुद्रा के रूप में व्यक्त करना विनिमय दर कहलाता है। $= 0.60 विनिमय

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अभ्यंस/कोटा

अभ्यंस/कोटा इसके अन्तर्गत भुगतान शेष नियंत्रित करने के लिए आयातों की मात्रा निर्धारित की जाती हैं अथवा उनका कोटा निर्धारित कर दिया जाता है जिससे देश उस मात्रा से अधिक वस्तु का आयात नहीं करता है। भारत में चालू खाते का घाटा वर्ष- 2013-14 में कुछ कम हुआ और इस दौरान यह 32.4 बिलियन डालर

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भुगतान शेष (Blance of Payment)

भुगतान शेष (Blance of Payment) भुगतान शेष किसी देश का अन्य देशों के साथ होने वाले समस्त आर्थिक लेन देन का लेखा होता है। जिसमें दोहरी प्रविष्टि की जाती है। भुगतान संतुलन के अवयव (Components of Blance of Payment) भुगतान शेष में चालू खाता एवं पूंजी खाता होतें हैं। चालू खाते में वस्तुगत व्यापार एवं अदृश्य

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म्यूचुअल फण्ड (Mutual funds) , Meaning, concept and Types of Mutual Fund

म्यूचुअल फण्ड (Mutual Funds) Meaning इसका तात्पर्य विशेषज्ञों द्वारा पूंजी बाजार में उन निवेसकों के पैसे लगाने से होता है जिन्हें पूंजी बाजार के सम्बन्ध में उपयुक्त जानकारी नहीं मिलती है। अथवा वे जोखिम से बचना चाहतें है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञयों की सलाह में पूंजी निवेश का कार्य किया जाता है। यह दो प्रकार

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परिमाणात्मक साख नियंत्रण:-

परिमाणात्मक साख नियंत्रण:- 1. बैंक दर:- वह दर होती है जिस पर व्यापारिक बैंक केन्द्रीय बैंक से ऋण प्राप्त करते हैं। यह व्याज दर से भिन्न होता है। बैंक दर वह होती है जिस पर केन्द्रीय बैंक बिलों की पुनर्कटौती करता है। साख नियंत्रित करते समय केन्द्रीय बैंक इस दर को बढ़ा देते हैं जबकि

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केन्द्रीय बजट 2015-16

केन्द्रीय बजट 2015-16 भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 के लिए केन्द्रीय बजट 28 फरवरी 2015 को वित्तमंत्री अरूण जेटली द्वारा प्रस्तुत किया गया। नये बजट में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को चुनौती के रूप में अथवा प्रमुख समस्या के रूप में प्रस्तुत किया गया। जिसमें भारतीय कृषि जी0डी0पी0 में विनिर्माण के क्षेत्र के हिस्से में आने

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केन्द्र, राज्य वित्तीय सम्बन्ध

केन्द्र, राज्य वित्तीय सम्बन्ध केन्द्र राज्य के बीच दो प्रकार के राजकोषीय असंतुलन पाये जाते हैं। यदि केन्द्र सरकार की आय उसके व्यय से अधिक हो जबकि राज्यों की आय व्यय से कम हो तो इसे उध्र्वाधर असंतुलन कहते हैं। यदि कुछ राज्यों की आय उसके व्यय से अधिक है जबकि कुछ राज्यों की आय

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नई विदेशी व्यापार नीति 2015-20

नई विदेशी व्यापार नीति 2015-20 भारत सरकार द्वारा नई व्यापारिक नीति 2015-20 के बीच घोषित की गयी इस नई नीति में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये जो केवल व्यापारिक नीति के उद्देश्यों से सम्बन्धित थे अपितु विभिन्न योजनाओं से भी सम्बन्धित थे। 1. नई व्यापारिक नीति में भारत के निर्यात का हिस्सा जो वर्ष 2013-14

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