जैव प्रौद्योगिकी (Bio-Technology)

जैव प्रौद्योगिकी (Bio-Technology) जीवाणुओं की सहायता से वस्तुओं के उत्पादन की प्रक्रिया जैव-प्रौद्योगिकी कहलाती है। यह प्रक्रिया सामान्य दाब, निम्न दाब, निम्न ताप तथा प्रायः उदासीन पी0एच (PH=7) पर सम्पन्न होती है। इस प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत सूक्ष्म जीवों, जीवित पादपों तथा पशुओं की कोशिकाओं का औद्योगिक प्रयोग होता है। इसका अन्तर्गत मुख्य रूप से ही

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डी0एन0ए0 पुर्नसंयोजन (DNA Recombination)

डी0एन0ए0 पुर्नसंयोजन (DNA Recombination) किसी जीव के DNA में किसी दूसरे जीव के DNA को जोड़ना या D.N.A में हेर-फेर को DNA पुर्नसंयोजन कहलाता है। आधुनिक उपकरणों की सहायता से उपर्युक्त क्रिया को सम्पन्न किया जाता है। इस प्रकार की तकनीक को आनुवंशिक इन्जीनियरिंग या D.N.A इन्जीनियरिंग कहते हैं। इस तकनीकी द्वारा DNA खण्डों के नये क्रम

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आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering)

आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) सुजननिकी (Eugenics) :- व्यावहारिक आनुवंशिकी की वह शाखा है जिसके अनतर्गत आनुवंशिकी के सिद्धान्तों की सहायता से मानव की भावी पीढ़ियों में लक्षणों की वंशागति को नियन्त्रित करके मानव की नस्ल को सुधारने का अध्ययन किया जाता है। सुजननिकी का वास्तविक उद्देश्य मानव जाति के आनुवंशिक लक्षणों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुधार करना

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वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)

वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) जीवित पौधे के वायवीय भागों में होने वाली जल हानि ही वाष्पोत्सर्जन है। जलवाष्प के रूप में पौधों से जल विसरित होता है। वाष्पोत्सर्जन की दर को प्रभावित करने वाले कारकों को आन्तरिक एवं बाहा्र कारकों की श्रेणी में बाँटा गया है। आन्तरिक कारक में पौधे की बनावट वाष्पोत्सर्जन की दर को प्रभावित

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जीवाणु (Bacteria)

जीवाणु (Bacteria) जीवाणु परपोषी प्रोकैरियोटिक कोशिका से बने सर्वव्यापी पर्णहरित रहित होते हैं। ये प्रायः एक कोशीय होते हैं। इनका आकार 2 से 5μ तक होता है। कुछ जीवाणु 80μ तक लम्बे होते हैं। इनको सर्वप्रथम ’एण्टोनी वान ल्यूवेनहाॅक’(Antony van Leeuwewhock) ने देखा। एरनबर्ग  1828 ने इन्हें जीवाणु नाम दिया। इनकी कोशिका भित्ति पाॅलीसैकराइड, लिपिड

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शैवाल तथा कवक (Algae and fungi)

शैवाल तथा कवक (Algae and fungi) शैवाल पर्णहरित युक्त पौधे हैं, इनके थैलस में वास्तविक जड़ें तना तथा पत्तियाँ आदि नहीं होती, अतः इन्हें थैलोफाइटा (Ophthalmology) वर्ग के अन्तर्गत रखा गया है। इनमें लिंगी प्रजनन के बाद भू्रण नहीं बनता। शैवाल समान्यतः नम स्थानों पर पाये जाते हैं, कुछ शैवाल पानी की सतह पर तैरते

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जन्तु ऊतक तथा शारीरिक संगठन (Animal Tissue & Body Organisation)

जन्तु ऊतक तथा शारीरिक संगठन (Animal Tissue & Body Organisation) ऊतक (Tissue) :-  कोशिकाओं का वह समूह जिसका उद्गम, संरचना एवं कार्य समान होता है, ऊतक कहलाता है। जन्तुओं के शरीर में पांच प्रकार के ऊतक- (1) उपकला ऊतक (Epithelial) :- पर्तों के रूप में शरीर का बाहरी एवं भीतरी रक्षात्मक आवरण बनाती है। (2) संयोजी

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कोशिका विभाजन (Cell Division)

कोशिका विभाजन (Cell Division) वातावरण में पाया जाने वाले प्रत्येक जीव एक कोशिकीय या बहुकोशिकीय होते हैं। सभी जीवों के जीवन की शुरुआत एक कोशिका से होती है। कोशिकाओं में विभाजन से नई कोशिकाएं बनती हैं और यह प्रक्रिया मृत्यु तक चलती रहती है। इस प्रक्रिया के लिए ऊर्जा ATP से प्राप्त होती है। कोशिका

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प्रकाश संश्लेषण (Photo Synthesis)

प्रकाश संश्लेषण (Photo Synthesis) प्रकाश संश्लेषण एक जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें पानी का आक्सीकरण तथा कार्बन डाइआक्साइड का अपचयन होता है। यह क्रिया प्रकाश एवं पर्णहरित की उपस्थिति में होती है जिसमें आक्सीजन मुक्त होती है और कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है। इसमें प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक पदार्थों में संचित हो

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वनस्पति विज्ञान – एक परिचय (Botany Introduction)

वनस्पति विज्ञान – एक परिचय (Botany Introduction) पौधों से संबंधित सभी प्रकार का अध्ययन वनस्पति विज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है। पौधों की वाह्य एवं आन्तरिक अकारिकी का अध्ययन, पौधों में श्वसन क्रिया, जल अवशोषण क्रिया, गति, प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण एवं उसका स्थानान्तरण, प्रजनन, विकास, जीवन चक्र, वातावरणीय अनुकूलन, पौधों की

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