15वां आयोग वित्त आयोग (15th Finance Commission)

15वां आयोग वित्त आयोग

15वां आयोग वित्त आयोग (15th Finance Commission)

15वां आयोग वित्त आयोगवित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1951′ |Finance Commission (Miscellaneous Provisions) Act, 19511 के उपबंधों के साथ पठित संविधान के अनुच्छेद 280 के खंड (1) के असरण में भारत सरकार ने राष्ट्रपति की स्वीकृति से 27 नवंबर. 2017 को 15वें वित्त आयोग के गठन की घोषणा की थी। 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन.के. सिंह हैं। श्री एन.के. सिंह भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं पूर्व संसद सदस्य हैं। श्री एन.के. सिंह वर्ष 2008-2014 तक बिहार से राज्य सभा के सदस्य रहे। 115वां वित्त आयोग निम्नलिखित विषयों के बारे में सिफारिशें करेगा .

  1.  केंद्र और राज्यों के मध्य करों के शुद्ध आगमों (Net Proceeds of Taxes) के वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगमों के तत्संबंधी भाग के आबंटन के बारे में, उल्लेखनीय है कि संविधान के भाग 12 के अध्याय 1 केअधीन करों के शुद्ध आगमों का केंद्र एवं राज्यों के मध्य विभाजन किया जाना है।
  2. भारत की संचित निधि में से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासित करने वाले सिद्धांत और संविधान के अनुच्छेद 275 के खंड (1) के परंतुक (Provisos) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 275 के अधीन राजस्वों में सहायता अनुदान के रूप में राज्यों को संदत्त की जाने वाली धनराशियां,
  3. राज्य के वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए किसी राज्य की संचित निधि के संवर्धन हेतु आवश्यक अध्युपाय।

15वां आयोग वित्त आयोग केंद्र और राज्यों की वर्तमान वित्त व्यवस्था, घाटे, ऋण स्तरों, नकदी शेष और राजकोषीय अनुशासन कायम रखने के प्रयासों की स्थिति की समीक्षा करेगा और मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के लिए राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) की रूपरेखा की सिफारिश करेगा। 15वां वित्त आयोग वित्त आयोग आयोग अपनी सिफारिशें देने के लिए वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों का प्रयोग करेगा। 15वां आयोग वित्त आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल, 2020 से 5 वर्ष की अवधि के लिए लागू होंगी।

2020-21 के लिए 15वां आयोग वित्त आयोग की रिपोर्ट

15वां आयोग वित्त आयोग की रिपोर्ट15वां आयोग वित्त आयोग दो रिपोर्ट सौंपेगा। आयोग की पहली रिपोर्ट । 1 फरवरी, 2020 को संसद के पटल पर रखी गई। इस रिपोर्ट में 2020-21 के लिए सुझाव दिए गए हैं। 2021-26 की अवधि के लिए दूसरी रिपोर्ट में सुझाव दिए जाएंगे और इस अंतिम रिपोर्ट को 30 अक्टूबर, 2020 को सौंपा जाएगा।

पहली रिपोर्ट (2020-21) के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं. केंद्र के टैक्स में राज्यों के हिस्से को 2015-20 की अवधि के मुकाबले 2020-21 में कम करने का सुझाव दिया गया है। पहले यह हिस्सा 42% था और अब 41% है। नव निर्मित केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्र सरकार द्वारा धनराशि देने के लिए 1% की गिरावट की गई.

हस्तांतरण के मानदंड (2020-21)

मानदंड 14वां आयोग 2015-20 15वां आयोग 2020-21
·        आय अंतर

·        जनसंख्या (1971)

·        जनसंख्या (2011)

·        क्षेत्र

·        वन क्षेत्र

·        वन और पारिस्थितिकी

·        जनसांख्यिकी प्रदर्शन

·        टैक्स के प्रयास कुल

·        50.0

·        17.5

·        10.0

·        15.0

·        07.5

·        –

·        –

·        –

·        45.0

·        –

·        15.0

·        15.0

·        –

·        10.0

·        12.5

·        2.5

Total 100 100

राज्य की आय और उस राज्य की उच्चतम आय के बीच के अंतर को आय-अंतर (इनकम-डिस्टेंस) कहा जाता है। वर्ष 2015-16 और 2017-18 के बीच की तीन वर्षीय अवधि के दौरान औसत प्रति व्यक्ति जीएसडीपी के आधार पर राज्य की आय गणना की जाती है। जिन राज्यों की प्रति व्यक्ति आय कम होती है, उन्हें विभिन्न राज्यों के बीच बराबरी कायम करने के लिए अधिक बड़ा हिस्सा दिया जाएगा।

15वां आयोग वित्त आयोग के संदर्भ की शर्तों (टीओआर) में यह अपेक्षित है कि सुझाव देते समय 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाए। इस प्रकार आयोग ने सुझावों में केवल 2011 के जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। किसी राज्य की कुल वन सघनता का सभी राज्यों की कल में हिस्सा निर्धारित करके इस मानदंड को निर्धारित
किसी राज्य की सघनता में हिस्सा निर्धारित किया गया है।

अधिक कर जमान शानदंड का प्रयोग किया गया है। इसी कर जमा करने वाले राज्यों को पुरस्कृत करने के लिए इस किया गया है। इसकी गणना 2014-15 और के बीच तीन वर्ष के दौरान प्रति व्यक्ति औसत कर पति व्यक्ति औसत राज्य जीडीपी के अनुपात के 2016-17 के बीच ती रूप में की गई है। वर्ष 2020-21 में राज्यों को निम्नलिखित में राज्यों को निम्नलिखित अनुदान दिए जाएंगे.

  1. राजस्व घाटा अनुदान
  2. स्वास्थ्य
  3. पूर्व प्राथिमक शिक्षा
  4. जुडीशियरी
  5. ग्रामीण कनेक्टिविटी
  6. रेलवे
  7. पुलिश और प्रशिक्षण संसथान
  8. आवास

प्रदर्शन आधारित अनुदानों के दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं- (i) कृषि सुधारों को लागू करना, (ii) महत्वाकांक्षी जिलों और ब्लॉक्स का विकास, (iii) बिजली क्षेत्र के सुधार, (iv) निर्यात सहित व्यापार को बढ़ाना, (v) शिक्षा के लिए इनसेंटिव्स और (vi) घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का संवर्धन। अनुदान राशि अंतिम रिपोर्ट में प्रदान की जाएगी।

वर्ष 2020-21 में स्थानीय निकायों के लिए 90,000 करोड़ रुपये तय किए गए हैं, जिनमें से 60,750 करोड़ रुपये ग्रामीण स्थानीय निकायों (67.5%) और 29,250 करोड़ रुपये शहरी स्थानीय निकायों (32.5%) के लिए निर्धारित किए गए हैं। २ यह अनुदान डिवाइजिबल पूल का 4.31 प्रतिशत है। यह वर्ष 2019-20 में स्थानीय निकायों को दिए गए अनुदान से ज्यादा है। तब इस मद में अनुदान राशि डिवाइजिबल पूल का 3.54 प्रतिशत (87,352 करोड़ रुपये) था। २ अनुदान जनसंख्या और क्षेत्र के आधार पर राज्यों के बीच 90:10 के अनुपात में विभाजित होंगे। ये अनुदान पंचायत के तीनों स्तरों गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर उपलब्ध होंगे। स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों को बेहतर बनाने के लिए आयोग ने राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन कोष (एनडीएमएफ और । एसडीएमएफ) के गठन का सुझाव दिया है।

वर्ष 2020-21 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोषों को 28,983 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं, जिसमें केंद्र का हिस्सा 22,184 करोड रुपये है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष को 12,390 करोड़ रुपये आबंटित किए गए है।

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