विश्व बैंक(World Bank) :-

अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निमाण एवं विकास बैंकInternational Bank for reconstruction and Development जो विश्व बैंक के नाम से प्रसिद्ध है, का जन्म संयुक्त राष्ट्र संघ के मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन का परिणाम है जो 1 जुलाई से 22 जुलाई 1944 तक ब्रेटनवुड्स नामक स्थान पर (अमरीका में) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष तथा विश्व बैंक से सम्बन्धित अनुच्छेदों को अंतिम रूप देने के लिए हुआ था। समझौते के अनुच्छेदों की बहुमत से स्वीकृति के बाद 25 दिसम्बर 1944 ई0 को विश्व बैंक का जन्म हुआ। यह अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सह संस्था है। वर्तमान में इसके 188 सदस्य देश हैं। तुवाल और दक्षिणी सुडान इसके नवीनतम सदस्य हैं वर्तमान में इसके अध्यक्ष जिमयोग किम हैं।

सदस्यता और संगठन:- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भांति विश्व बैंक का ढांचा त्रिस्तरीय है इसका एक अध्यक्ष होता है, दूसरे स्तर पर अधिशासी निदेशक होते हैं, और तीसरे स्तर पर शासक मण्डल होता है। निदेशक बोर्ड की मीटिंग एक महीने में एक बार होती है जिसकी अध्यक्षता शासक मण्डल का अध्यक्ष करता है।
कोई भी देश जो विश्व बैंक के समझौते पत्र की शर्तों को स्वीकार करता है बैंक का सदस्य बन सकता है। कोई भी सदस्य किसी भी समय बैंक की सदस्यता का परित्याग कर सकता है। फिर भी सदस्य को बैंक की सदस्यता का त्याग करने के लिए बैंक को लिखित सूचना देनी पड़ती है। यदि सदस्य बैंक के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने में असफल होता है तो बैंक उसे निलम्बित कर सकता है। सदस्यता को त्यागने तक अगर बैंक को कोई हानि हो रही है तो उस देश पर हानि को पूरा करने का दायित्व होगा।

उद्देश्य (Functions)

विश्व बैंक एक संसर्ग संस्था है जिसकी पूंजी पर उसके सदस्यों का अधिकार होता हे। इस संस्था के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार हैं:-
1. उत्पादक कार्यों पर विनियोग के लिए पूंजी की सुविधा प्रदान करके सदस्य सरकारों की अर्थव्यवस्थाओं के पुनर्निमाण व विकास में सहायता देना।
2. व्यक्तिगत तथा संस्थागत निवेशकर्ताओं को उनके ऋणों के भुगतानों की गारण्टी देकर अथवा उनके साथ निवेशकर्ता के रूप में सम्मिलित होकर सदस्य देशों में व्यक्तिगत तथा संस्थागत ऋण पूंजी का विस्तार करना।
3. जहाँ तर्क संगत दरों पर व्यक्तिगत पूंजी उपलब्ध नहीं है वहाँ अपने निजी साधनों या अन्य स्रोतों से उधार प्राप्त करके उत्पादक कार्यों के लिए पूंजी की व्यवस्था करना।
4. सदस्य देशों में उत्पादक कार्यों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय निवेश को प्रोत्साहित करके दीर्घकालीन स्थायी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा संतुलित भुगतान को बढ़ावा देना।

भारत तथा विश्व बैंक
(Indian and the world bank)

भारत, बैंक के संस्थापक सदस्यों में से एक है। इसे अधिशासी निदेश बोर्ड पर बहुत वर्षों तक स्थायी स्थान प्राप्त था। बैंक भारत को ऋण देकर, क्षेत्र सर्वेक्षण करके, विशेषज्ञतापूर्ण सलाह देकर, मिशन तथा अध्ययन दल भेजकर और म्क्प् में भारतीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर, भारत के योजनाबद्ध आर्थिक विकास में सहायता देता रहा है। बैंक के मिशन का नई दिल्ली में एक प्रमुख अधिकारी भी है जो भारत में सहायतादत्त परियोजनाओं की देखभाल और परामर्श के लिए बैंक का प्रतिनिधित्व करता है।

इस प्रकार विश्व बैंक का सदस्य होने के नाते भारत ने कृषि, उद्योग, ऊर्जा और परिवहन के विकास में बहुत लाभ उठाया है। परन्तु अब क्योंकि प्क्। से प्राप्त होने वाली राशि घट गई है इसलिए भविष्य में भारत को बैंक से अधिक उधार लेना पड़ेगा। इससे भारत के संसाधनों पर भारी बोझ पड़ेगा क्योंकि EDI। ऋणों की अपेक्षा बैंक के ऋणों की शर्तें बहुत अधिक कठोर हैं।

विश्व बैंक ग्रुप
(The world Bank group)

IBRD एवं IDA को सामान्यतया विश्व बैंक की संज्ञा दी जाती है। जबकि विश्व बैंक समूह में पाँच संस्थायें शामिल हैं।

  1. IBRD(The International Bank for Reconstruction and Development)
  2. IDA(International Development Association)
  3. IFC(Indian Finance Crop ration)
  4. MIGA(Multinational  Investment Guarantee Agency)
  5. ICAID( International Center for Settlement of Investment Disputes )