लवणता

सागरीय लवणता से तात्पर्य सागरीय जल मे पाये जाने वाले पदार्थों की मात्रा के अनुपात से है। इसको ग्राम/हजार % जल में पाये जाने वाले पदार्थों की मात्रा में प्रदर्शित किया जाता है। यह % प्रतिशत में नहीं व्यक्त किया जाता/बल्कि इसे मात्रा में व्यक्त करते हैं।

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समान लवणता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समलवा रेखा या Isohalineकहते हैं।

सम्पूर्ण सागरीय जल की औसत लवणता 35 प्रतिशत है। उत्तरी गोलार्द्ध में लवणता की मात्रा 34 और दक्षिणी गोलार्द्ध में लवणता की मात्रा 35 प्रतिशत है।

लवण के प्रकार Component of Sea Salinity %

1. सोडियम क्लोराइड (Nacl) 27.2 77.8%
2MAIGNISHIYAM.मैग्नीशियम क्लोराइड (Mglcl2) 3.8 10.9%
3. मैग्नीशियम सल्फेट (Mgso4) 3.8 4.7%
4. कैल्शियम सल्फेट (Caso4) 1.3 3.6%
5. पोटैशियम सल्फेट (K2so4) 1.3 2.5%
6. कैल्शियम कार्बोनेट (Caco3) .1 3%
7. मैग्नेशियम ब्रोमाइड (MgBrn2) 0.7 3%                                                                                                                                                                                 35.00    100.00

लवणता को प्रभावित करने वाले कारक –

1.वाष्पीकरण :- अधिक वाष्पीकरण से लवणता अधिक होगी। विषुवत रेखा पर अधिक लवणता न पाये जाने के कारण यह है कि वहाॅ अधिक वाष्पोत्सर्जन के साथ अधिक वर्षा भी होती है। सर्वाधिक लवणता उत्तरी गोलार्द्ध में 10º-30º N के बीच तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 20º-40º S के बीच पायी जाती है। क्योंकि यहाॅ वाष्पीकरण अधिक होता है तथा सीमान्त सागर एवं आन्तरिक सागर में नदियों का प्रवाह कम है।

2. नदी का जल :- नदी का जल सागरीय लवणता को कम करता है हिन्द महासागर की औसत सागरीय लवणता 35 है। जबकि बंगाल की खाड़ी की लवणता 30 प्रतिशत है और अरब सागर की लवणता 35 प्रतिशत है।

कैस्पियन सागर में उत्तरी कैस्यिन सागर की लवणता यूराल और बोल्गा के उत्तरी कैस्पियन में मिलने के कारण कम है लगभग 20 प्रतिशत जबकि दक्षिणी कैस्पियन सागर में लवणता की मात्रा अधिक 120 प्रतिशत है। इसी प्रकार काला सागर की लवणता के कम पाये जाने के कारण डेन्यूब और नीयर नदियोंका इसमें गिरना है।

वायुदाब एवं पवनें :- मैक्सिको की खाड़ी में ब्यापारिक पवनों के कारण एवं उत्तरी सागर में पछुवा पवनों के कारण लवणता अधिक पायी जाती है।
सागरीय धारा- हड़सन की खाड़ी बाल्टिक सागर की औसत लवणता 3-15 प्रतिशत के बीच पायी जाती है, उसके बाद कालासागर की लवणता 10-20 प्रतिशत पायी जाती है जो सर्वाधिक कम लवणता है।

लाल सागर की लवणता — 37-41 प्रतिशत
फारस की खाड़ी         — 36-89 प्रतिशत
भू-मध्य सागर           — 36-38 प्रतिशत

सर्वाधिक लवणता टर्की की वान झील 330% पायी जाती है। उसके बाद मृतसागर 240 प्रतिशत तथा उसके बाद यू0एस0ए0 का ग्रेट लेक्स 220 प्रतिशत लवणता पायी जाती है।

सागरीय निक्षेप

सागरीय तली पर पाये जाने वाले अवसाद सागरीय निक्षेप कहलाते हैं।

निक्षेप के प्रकार –

1. स्थलीय या भूमिज निक्षेप- या भूमि के माध्यम से होने वाले निक्षेप- (Gravel) बजड़ी, (Sand) रेत (Silt) सिल्ट़, (Clay) मृतिका़, (Mud) पंक।
2. ज्वालामुखी निक्षेप
3. उल्का पिण्डीय निक्षेप
4. जैविक निक्षेप :- जैविक निक्षेप में दो प्रकार के निक्षेप पाये जाते हैं- 1 तट के पास जिसे Naritic Material एवं अगाध सागर में Palaice  Material पाये जाते हैं।Palasic Material  में चूना प्रधान जैविक निक्षेप पायेजाते हैं जिसमें टोरोपाॅड एवं ग्लोबोजिसा है।

Palasic Material में सिलिका प्रधान जैविक निक्षेप पाये जाते हैं जिसमें डायटम एवं रेडियोलाइरियन है।

सागरीय धारायें (Sea Current)

जल प्रवाह :- पवन के घर्षण से अनिश्चित दिशा में जल राशि के मन्द गति से संचरण को जल-प्रवाह कहते हैं।

धारा :- महासागरीय विशाल जलराशि जो एक निश्चित दिशा में एक निश्चित गति से एक निश्चित क्षेत्र में प्रवाहित होने वाले जल को जल धारा कहते हैं।

Streem :- विभिन्न जल धाराओं के संयुक्त जलराशि को जो तीव्र वेग से प्रवाहित हो रहा है Streem कहा जाता है। उदाहरण-गल्फ स्ट्रीम या खाड़ी की धारा।

जल धारा प्रवाहित करने वाले कारक रू. जल धाराओं का प्रवाह हमेशा कम से अधिक की तरफ होता है।

1. पृथ्वी का परिभ्रमण :-  पृथ्वी का परिभ्रमण Anti-clock wise  है। सूर्य के आकर्षण बल के कारण पृथ्वी का जल पृथ्वी के साथ नही दे पाता है। इसलिए धारायें पूर्व से पश्चिम की तरफ चलती हैं।
2. तापमानः-
3. स्थायी पवने एवं वायुदाबः-
4. लवणताः-
5. वर्शा एवं वाश्पीकरण
6. सागरीय स्थलाकृतिः-
7. मौसम का परिवर्तनः-
जल धाराओं के स्वभाव के आधार पर दो भागों में विभजित किया जाता हैः- 1 गर्म जलधारा, 2 ठण्डी जलधारा,

अटलांटिक महासागरीय धारायें-

1. उत्तरीय विषुवतीय रेखीय गर्म जल धारा।
2. दक्षिण विषुवत रेखीय गर्म जल धारा।
3. प्रति विषुवत रेखीय गर्म जल धारा- गिनी धारा
4. एन्टीलीज जल धारा।
5. कैरिबियन जल धारा।
6. मैक्सिको जल धारा।
7. फ्ालोरिडा जल धारा।
8. गल्फ स्ट्रीम जल धारा।
9. उत्तरी अटलांटिक गर्म जल धारा।
10. लेब्रोडोर ठंडी जल धारा।
11. दूर मिजर गर्म जल धारा।
12. ग्रीन लैण्ड ठण्डी जल धारा।
13. नार्वेजियन जल धारा।
14. रेनले गर्म जल धारा।
15. कनारी ठण्डी जल धारा।
16. ब्राजील गर्म जल धारा।
17. फाॅक लैण्ड ठंण्डी जल धारा।
18. दक्षिणी अटलांटिक प्रवाह ठण्डी जल धारा वेंगुएला ठण्डी जल धारा। एन्टीलीज और फ्लोरिडा (कैरोबियन और मैक्सिको) गर्म जल धारा हेटरसा दीव (यूकाटन प्रायद्वीप, फ्लोरिडा जल संधि) के पास मिलते है जहाॅ से इसे धारा को गल्फ स्ट्रीम धारा कहते हैं जिसका प्रवाह न्यूफाउड तक है।

गल्फ स्ट्रीम की गर्म जल धारा की खोज 1513 में लिओन ने की थी। गल्फ स्ट्रीम की गर्म जल धारा एवं लैब्राडोर की ठण्डी जल धारा न्यू फाउंड लैण्ड में मिलते हैं। जहाॅ पर विश्व में द्वितीय स्थान मछली उत्पादन केन्द्र जार्ज बैंक या ग्राड बैंक का निर्माण करते हैं।

गल्फ स्ट्रीम और उ0 अटलांटिक प्रवाह को पश्चिमी यूारोप का कम्बल कहा जाता है।

बरमुड़ा त्रिकोण :- यह उत्तरी अटलांटिक महासागर में यू0एस0ए0 के पूर्वी तट के पास पाया जाता है। इसे शैतानी त्रिकोण भी कहा जाता है।
1. उत्तरी विषुवत रेखीय गर्म जल धारा।
2. दक्षिणी विषुवत रेखीय गर्म जल धारा।
3. प्रति विषुवत रेखीय गर्म जल धारा।
4. क्यूरोशियो गर्म जल धारा।
5. सुशीम गर्म जल धारा।
6. उ0 प्रशान्त प्रवाह गर्म जल धारा।
7. अलास्का गर्म जल धारा।
8. क्यराइल (आयोशिया) ठण्डी जल धारा।
9. फोर्निया की ठंडी जलधारा।
10. पूर्वी आस्ट्रेलिया गर्म जल धारा।
11. द0 प्रशान्त प्रवाह ठण्डी जल धारा।
12. पीरू ठंडी (हम्बोल्ट) जल धारा- पीरू जलधारा की खोज हम्बोल्ट ने की थी।
13. अलनीनो गर्म जल धारा।

क्यूरोशियो को प्रशान्त का गल्फ स्ट्रीम कहते हैं। क्यूरोशियो एवं उत्तरी प्रशान्त प्रवाह से उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के बन्दरगाह सर्दियों में भी खुले रहते हैं। क्यूराइल की ठंण्डी जल धारा और क्यूरोशियों की गर्म जल धारा होकैडो द्वीप के पास मिलती है।

बेरिंग जल संधि से सखालिन द्वीप तक क्यूराइल को आयोशिया की ठंडी जल धारा कहते हैं। साखालिन द्वीप से होकैडो द्वीप तक इसे कामस चटका, या क्यूराइल ठंडी जल धारा कहते हैं।

हुकैडो द्वीप के पास जहाॅ क्यूराइल (ठंडी) क्यूरेशियों गर्म जल धारा से मिलता है वहाॅ कुहरा उत्पन्न होता है तथा इस स्थान पर ढलवक का विकास होता है तथा यहाॅ मछलियां बहुत पैदा होती है। यह स्थान मछलियों के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान रखता है।

मत्सय आहरण के लिए पूर्वी एशिया का शीतोष्ण क्षेत्र प्रथम स्थान रखता है दूसरा स्थान न्यूफाउडलैंड तथा तीसरा स्थान उत्तरी सागर में स्थित डागर बैंक का है और चैथा स्थान उत्तरी अमेरिका का वह क्षेत्र जहाॅ कैली फोर्निया और उत्तरी विषुवत रेखीय जल धारा मिलती है।

हिन्द महासागर की जल धारा

हिन्द महासागर की जल धाराओं पर भारतीय मानसून का प्रमुख प्रभाव है।

1. उत्तर-पूर्वी मानसूनी गर्म जल धारा।
2. दक्षिणी पूर्वी मानसूनी गर्म जल धारा।
3. प्रति विषुवतीय गर्म जल धारा।
4. दक्षिणी विषुवत रेखीय गर्म जल धारा।
5. मेडागास्कर मोजाम्बिक गर्म जल धारा।
6. अंगुल्हास गर्म जल धारा।
7. दक्षिणी हिन्द महासागरीय ठण्डी जल धारा।
8. पश्चिमी आस्ट्रेलिया ठण्डी जल धारा।

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