महत्वपूर्ण गर्त

महत्वपूर्ण गर्त :-

चैलेन्जर या मैरियाना गर्त – यह फीलीपीन्स के पास उत्तरी प्रशान्त महासागर में 11किमी0 सबसे गहरा (विश्व में) गर्त है।

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प्रोटोरिको – उत्तरी अटलांटिक महासागर में पश्चिमी द्वीप के पास जो पाया जाता है जो अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त है।

सुडान गर्त – यह उत्तरी हिन्द महासागर का सबसे गहरा गर्त है कुल गर्त 57 है जिसमें सर्वाधिक गर्त प्रशान्त महासागर में है जिसकी मात्रा 32 है उसके बाद अटलांटिक में 19 और हिन्द महासागर में 6 गर्त पायी जाती है।

टिसोसरोरा – जापान के पास पाया जाने वाल गर्त। सागर के नितल से 1000मी0 ऊँचाई वाले भू-भाग को समुद्र पर्वत कहते हैं और अगर यह संरचना पठार की तरह हो अर्थात चौरस हो तो उसे गुयाॅट कहते हैं।

आन्ध्र महासागर का नितल उच्चावच्च

इसका आकार S अक्षर के समान है। उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट और यूरोप के पश्चिमी तट पर मग्नतट चैडे़ पाये जाते है, जिसमें न्यूफाउडलैण्ड, ग्रीन लैण्ड, आइस लैण्ड, और ब्रिटिश द्वीप समूह आदि मग्न तट पर पाये जाते हैं। मग्न तट स्थित सीमान्त सागरों में हड़सन की खाड़ी बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, लैबाडोर सागर, कैरिबियन सागर, मैक्सिको की खाडी, गिनी की खाड़ी, रूम सागर, भू-मध्य सागर, बिस्के की खाडी, बाल्टिक सागर, उत्तर सागर, नार्वेजियन सागर।

अटलांटिक महासागर में पायी जाने वाली बेसिनों में हड़सन बेसिन लैबाडोर बेसिन उत्तरी अमेरिका बेसिन, केपयाई बेसिन, अगाला बेसिन, बिस्के की खाड़ी, उत्तरी सागर।

विषुवत रेखा के उत्तर मध्य महासागरीय कटक को डाल्फिन कटक कहा जाता है और विषुवत रेखा के दक्षिण में इसे चैलेन्जर कटक कहा जाता है। अटलांटिक महासागर मे मध्य महासागरीय कटक का विस्तार उत्तर में आइसलैण्ड से लेकर और दक्षिण में बोवेट द्वीप तक पाया जाता है।

ग्रीन लैण्ड और आइसलैण्ड के बीच में विविल टामसन कटक पाया जाता है। ग्रीन लैण्ड और बैफिन द्वीप के बीच में टेलीग्राफिक पठार पाया जाता है।

दक्षिणी गोलार्द्ध में 40º अक्षांश के पास चैलेन्जर कटक से एक शाखा अफ्रीका महाद्वीप से मिलती है जिसे वालनिस कटक के नाम से जाना जाता है।

अटलांटिक महासागर में डाल्फिन कटक के पास सबसे ऊँचा दीप अजोर्स पाया जाता है जो पुर्तगाल के कब्जे में हैं। अटलांटिक महासागर के दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र में बरमुड़ा द्वीप पाया जाता है जो यू0एस0ए0 के कब्जे में हैं।

प्रशान्त महासागर का विस्तार उत्तर में बेरिंग जलसंधि से लेकर दक्षिण में अटार्कटिका तक है। इसकी उत्तरी से दक्षिण ला0-14400किमी0 तथा पूर्व से पश्चिम लगभग 16000 किमी0 है।
प्रसान्त महासागर मे कटक नहीं पाये जाते हैं। बल्कि सामान्य रूप में कुछ उभार पाये जाते हैं- जैसे-हवायन उभार हवाई द्वीप अलब्रटास पठार (चिली के पास) पाये जाते है।

सर्वाधिक गर्त उत्तरी-पश्चिमी प्रशान्त महासागर में पाये जाते हैं। टोंगा फिलीपीन्स गर्त, मेरियाना गर्त या जैलेन्जर गर्त, जामान गर्त(टास्कशेरा के पास) आदि गर्त इस महासागर में पाये जाते हैं।

प्रशान्त महासागर में पाये जाने वाले सीमान्त सागरों में बेरिंग सागर, ओखोटस सागर, जापान सागर, चीन सागर, पनामा सागर, कैलिफोर्निया की खाड़ी , अलास्का की खाड़ी आदि है।

हवाई द्वीप (इसी पर होनोलुल पाया जाता है जो एक बड़ा बन्दरगाह है) यह यू0एस0ए0 के अधिकार क्षेत्र में है जो प्रशान्त महासागर में 20º अक्षांश और 660º पूर्वी देशान्तर पर पाया जाता है।

हिन्द महासागर का नितल उच्चावच्च

इसके चारों तरफ पाये जाने वाले देश गोण्डवाना लैण्ड के भाग हैं। महाद्वीपीय मग्न तट में पूर्वी अफ्रीका, भारत का पश्चिमी तट, आस्ट्रेलिया का पश्चिमी तट आदि के मग्न तट डे़ पाये जाते है।

हिन्द महासागर में मेडागास्क्र द्वीप, कोमोरोस द्वीप (जंजीबार के पास) सेरोल्स द्वीप चागोस द्वीप, मारीसस द्वीप, अंडबार निकोबार द्वीप आदि मग्न तट पर पाये जाने वाले द्वीप है।

सीमान्त सागर एवं खाड़ियाॅ – अरब सागर, ओमान की खाड़ी फारस की खाड़ी, लाल सागर, अदन की खाड़ी, मोजाम्बिक चैनल, मेडागास्कर और अफ्रीका को अलग करता है। जावा सागर, तिमोर सागर, बंगाल की खाडी़। हिन्द महासागर में कन्याकुमारी के केपकेमोरिन से लेकर अंटार्कटिका तक महासागरीय कटक पाये जाते हैं।

भारत से लेकर विषुवत रेखा तक इस कटक को लकादीव चैगोस कटक कहते हैं। विषुवत रेखा से लेकर 30º दक्षिण तक इस कटक को Iसेंटपाल चौगोस कटक कहते हैं। 30सी0 तक इसे एमस्टरडम कटक कहते हैं। 40º – 50º के बीच में कारगुलेन गास बर्ग कटक पाये जाते हैं। लकादीव, सेटपाल, तथा एमस्टरडम और कागुलेन द्वीप भी है।
0º से लेकर 30ºS के कटक की एक शाखा 5º पर अफ्रीका की तरफ जाती है जो सोकोत्रा कटक है तथा जिसपर सोकोत्रा दीप स्थित है।

इसी प्रकार 18º पर भी एक शाखा अफ्रीका की तरफ जाती है जिसे सैचलीज कटक कहते हैं। जिसपर सैचलीज द्वीप स्थित है।
काल्स बर्ग कटक अरब सागर को दो भागों में बाॅटता है। यह नवीनतम कटकों में से एक है। इसका विस्तार अफ्रीका महाद्वीप की तरफ है।

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