‘भूकम्प'(Earth Quakes)

ज्ञात या अज्ञात, वाह्य अथवा अन्तर्जात कारणों से उत्पन्न पृथ्वी में कम्पन को ही भू-कम्प कहते हैं।

जहाँ से भू-कम्प तरंग की उत्पत्ति या पादुर्भाव होता है उसको भूकम्प केन्द्र या भूकम्प मूल या Focus कहा जाता है और सर्वप्रथम भूकम्प की तरंगें जहाँ पहुँचती है उसको अधिकेन्द्र (Epicenter) कहा जाता है।

Epicenter पर ही Seismogrphie Center (भूकम्प लेखन केन्द्र) की स्थापना की जाती है।

भारत में प्रमुख भू-कम्प लेखन केन्द्र (Easnographie Center) पाँच हैं।

  1. . कोलकाता
  2.  . पूना      सर्वप्रथम कलकत्ता में भूकम्प लेखन केन्द्र की
  3.   देहरादून स्थापना हुई।
  4.  मुम्बई. दिल्लीै

Seismology –. भूकम्पीय तरंगों या भूकम्पनीय आघात क्षेत्रों का अध्ययन करने वाला विज्ञान Seismology कहलाता है।

भूकम्प को नापने के स्केल:-

  1.  मारकेली स्केल
  2.  रियक्टर स्केल

. मारकेली स्केल:-

  1.  तीव्रता के आधार पर यह स्केल है।
  2.  मानक 1-12 माना गया है।
  3.   अनुभव के आधार पर निर्माण किया गया है।
  4.  उत्पन्न तरंगों से कितनी हानि हुई इस आधार पर इस स्केल से नापा जाता है।

 2. रियक्टर स्केल:-ं

  1.  ज्यामितीय है।
  2.  मानक 1-9 है।
  3.   इसका आधार ऊर्जा है।
  •   कितने Force से तरंगे या ऊर्जा बाहर निकल रही हैं।
  •   रियक्टर स्केल के अगले क्रम में 1ः10 की वृद्धि होती है।
  •   भूकम्प केन्द्र से निकलने वाली तरंगे कई प्रकार की होती हैं।
  1.  P-Waves
  2. S-Waves
  3. L-Waves

1. P- Waves:-इन्हें प्राथमिक तरंगें भी कहते हैं। Pull And Push Waves भी कहते हैं।

इन्हें Compresional Waves (अनुर्दध्र्य तरंग) भी कहते हैं। ये तरंगे ध्वनि तरंगों के समान होती हैं। 8 किमी0/सेकण्ड से अधिक इनकी गति होती है। ठोस, द्रव, गैस तीनों माध्यम में चलती हैं। लहरें के समानान्तर चलती हैं।

 2 S-Waves- इन्हें अनुप्रस्थ या आड़ी तरंगें (∴ 90 का कोण बनाती हैं) भी कहते हैं। इन तरंगों की गति धीमी 4-5 किमी0/सेकण्ड होती हैं। प्रकाश या जल के तरंगों के समान इसकी समानता पायी जाती है। ये तरल अवस्था में नही चलती हैं।

 3.L-Waves(Longitudinal-Waves)- ये सबसे भयंकर और विनाशकारी तरंग हैं।

  •   2-3 किमी0/सेकण्ड की गति से चलती है।
  •   सबसे अधिक दूरी तय करती है।
  •   पृथ्वी की सतह (surface) पर चलने वाली तरंग है।

 भूकम्प का कारण:- भू-पटल के सन्तुलन में अव्यवस्था ही भूकम्प का कारण है।

 भूकम्प की उत्पत्ति में कारक तत्व:-

  1.  ज्वालामुखी क्रिया-1833 ई0 में क्राकाटोआ ज्वालामुखी में।
  2.   भू-पटल में भं्रशन-उदाहरण-असम का भूकम्प।

 

  1.   1967 में कोयना (महाराष्ट्र) का भूकम्प ये माना जाता है कि भू-पटल भ्रन्शन के कारण ही आया।
  2. H.F Ried ने प्रत्यास्थ पुन्श्चलन सिद्धान्त का प्रतिपादन किया और वर्तमान में भू-कम्प की उत्पत्ति में यह सिद्धान्त सही सिद्धि है।
  3.  भू-पटल में असन्तुलन।
  4.   जलीय भार का दबाव-मानव निर्मित जलाशयों से पृथ्वी की सतह पर दबाव पड़ता है जिससे भूकम्प की उत्पत्ति होती है।
  5.   भू-पटल के सिकुड़न।

 6. गैसों का दबाव:-किसी भी रूप में जब जल पृथ्वी के अन्दर प्रवेश करता है तब जल, जलवाष्प या गैस में बदलता है और तप्त होकर गैस की तीव्रता में वृद्धि होती है जो भू-पटल को प्रभावित करता है।

 7. प्लेट टेक्टानिक:- प्लेटों की क्रिया द्वारा भू-कम्पन का आना।

अवस्थतिकी (स्थिति) के आधार पर भू-कम्पन के प्रकार:-

  1.  स्थलीय भू-कम्प
  2.  सागरीय भू-कम्प उदा0- सुनामी

कारकों के आधार पर भू-कम्प को 4 भागों में बाॅटा गया है।

  1.  ज्वालामुखी क्रिया
  2.  भ्रशन
  3.  भू-अंसन्तुलन
  4.  प्लेट टक्टानिक

भूकम्प मूलके आधार पर या भू-कम्प को गहराई के आधार पर 3 भागों में विभाजित किया गया है-

सामान्य भू-कम्प:- सतह से 50 किमी0 तक की गहराई वाले भू-कम्प को सामान्य भू-कम्प कहते है।

मध्यवर्ती भू-कम्प या मध्यम गहराई भू-कम्प:- 50 किमी0 250 किमी0 तक।

पातालीय या गहरे भू-कम्प अधिक गहराई भू-कम्प:- 250 से 700 कमी0 तक सबसे विनाश कारी यही भू-कम्प होते है।

भू-कम्प का विवरण

 1. परिप्रशान्त तटीय पेटी – यह विश्व का सबसे विस्तृत भू-कम्प क्षेत्र है जहां पर सम्पूर्ण विश्व का 63 प्रतिशत भू-कम्प आता है। इस क्षेत्र में चिली, कैलिकोर्निया, अलास्का, जापान फिलीपींस न्यूजीलैंड आदि आते है।

2. मध्य महाद्वीपीय पेटी (भू-कम्प सागरीय पेटी):- यूरोप का आल्पस भारत का हिमालय और बर्मा का अराकानयोमा, चीन का कुनलुन और त्योनसाॅग पर्वत भारत में यह पेटी पायी जा रही है।

3. अटलांटिक कटक पेटी:- Icekand से बोवेट द्वीप तक। भू-मघ्य रेखा के पास सर्वाधिक भू-कम्प क्षेत्र पाया जाता है।

भारत को भू-कम्पीय क्षेत्रों के आधार पर 3 भागों में बाॅटा गया है।

  1.   हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र।
  2. सिन्ध गांगा का मैदान।
  3. प्रायद्वीपीय भारत।

हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में सबसे अधिक भू-कम्प आता है। जबकि प्रायाद्विपीय भारत में आता है।

Isoceismal Line (सम-भूकम्प रेखा):- समान आघातीय क्षेत्रों को मिलाने वाली तरंगों को Isoceismal Line(सम-भूकम्पीय रेखा) कहा जाता है।

Homaseimal Line – एक ही समय मे समान आघातीय क्षेत्रों को मिलाने वाली तरंगों को या रेखा को  Homaseimal Line कहते है।

नोट:-

  • भारत में सबसे विनाशकारी भू-कम्प 1787 ई0 में कलकत्ता में आया था।
  •   1956 में कच्छ (गुजरात में आया था)
  • 1967 में कोयना (महाराष्ट्र) में आया था।
  • 1993 में लातूर (महाराष्ट्र) में भू-कम्प आया था।
  • 25 अप्रैल 2015 का नेपाल में भूकम्प I

Seismograph :- जिन संवेदनशील यंत्रों द्वारा भूकम्पीय तरंगों तीव्रता मापी जाती है उसे भू-कम्प लेखीय या Seismograph कहते है।