भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पूर्व महत्वपूर्ण राजनीतिक

संगठन

दिसम्बर 1885 मे भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना अचानक घटी कोई घटना नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक जागृति की चरम पराकाष्ठा थी।काँग्रेस  की स्थापना से पहले भी अनेक राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों की स्थापना हो चुकी थी। इन संगठनों का विवरण निम्नवत है।

बंग भाषा प्रकाशन सभा- 1836 ई0 में राजा राममोहन राय के अनुयायिओं द्वारा स्थापित यह संगठन सरकार की नीतियों से संबंधित मामलों की समीक्षा करती थी।

लैंड होल्डर्स सोसायटी- इसकी स्थापना बंगाल के जमीदारों ने 1838 ई0 में की थी। इसके माध्यम से उन्होंने भूमि के अतिक्रमण व अपहरण का विरोध किया। इस तरह का यह पहला संगठित राजनीतिक प्रयास था।

बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी- सन् 1843 में संस्था का उद्ेश्य आम जनता के हितों की रक्षा करना तथा उन्हें बढ़ावा देना था।

ब्रिटिश हंडिया एसोशिएशन- सन् 1851 में लैण्ड होलडर्स सोसायटी एवं बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी के विलय के उपरांत यह संगन अस्तित्व में आया। आध्यक्ष राधाकान्त देव थे।  1852 ई0 में बाॅम्बे एसोसिएशन तथा मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना की गई। इन संस्थाओं ने अपने-अपने क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखा।

 पूना सर्वजनिक सभा- इसकी स्थापना एम0जी0 राणाडे गणेश वसुदेव एवं अन्य सहयोगियों ने 1870 ई0 में की इस संस्था ने राजनैतिक चेतना जगाने में काफी योगदान दिया।

 ईस्ट इंडिया एसोसिएशन- लंदन में राजनैतिक प्रचार के उदेश्य से दादा भाई नौरोजी द्वारा 1867 ई0 में इसकी स्थापना की गई थी। इसकी बहुत सी शाखाएॅ भारत में खोली गई।  इंडियन लीग- सन् 1875 में शिशिर कुमार घोष ने इसकी स्थापना की थी।

 इंडियन एसोसिएशन- इंडियन एसोसिएशन की स्थापना सन् 1876 में सूरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस ने की। इस संस्था को भारतीय राष्ट्रीय  काँग्रेस का पूर्वगामी कहा गया भारत में प्रबल जनमत तैयार करना, हिंदू-मुस्लिम जनसंपर्क की स्थापना करना, सार्वजनिक कार्यक्रम के आधार पर लोगों को संगठित करना, सिविल सेवा के भारतीयकरण के पक्ष में मत तैयार करना आदि इसके प्रमुख उद्देश्य थे।

 मद्रास महाजन सभा- सन् 1884 मे वीर राधवाचारी, जी. सुब्रम्हण्यम् अय्यर और आनंद चारलू ने मद्रास महाजन सभा की स्थापना की।ऽ 1885 ई. में बंबई प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की स्थापना फिरोजशाह मेहता, के.टी. तैलंग और बदरूद्दीन तैय्यबजी ने मिलकर की। फिरोजशाह मेहता को बाॅम्बे का बेताज बादशाह कहा जाता था।   यद्यपि उपरोक्त सभी संस्थाएँ राजनीतिक गतिविधियों के संचालन मे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रही थी, तथापि इनमें से अधिकांश का आधार क्षेत्रीय था तथा ये संकीर्ण हितों का प्रतिनिधत्व करते थे। अधिकांश संस्थाओं की अभिजात्य दृष्टि थी। अतः आवश्यकता इस बात की थी कि इन सभी प्रयत्नों को संगठित कर एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की जाए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से यह आवश्यकता पूरी हुई।