पोषण: (Nutrition)

वह सम्पूर्ण प्रक्रिया जिसके अन्तर्गत जीवधारी वातावरण से भोज्य पदार्थों को ग्रहण करके इसे कोशिकाओं द्वारा प्रयोग किये जाने योग्य बनाते हैं जिससे इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि तथा मरम्मत में किया जा सके, ’पोषण’ कहलाती है। जन्तुओं में यह प्रक्रिया पांच चरणों में सम्पन्न होती है-

पहला चरण ’अन्तर्ग्रहण’ कहलाता है जिसके अन्तर्गत भोजन ग्रहण किया जाता है। इसका दूसरा चरण पाचन (Digestion) है जिसमें ग्रहण किये ठोस या तरल अघुलनशील जटिल पदार्थों को सरल घुलनशील इकाइयों में बदलने की क्रिया सम्पन्न होती है। भोजन का पाचन आहार नाल में होता है। प्रक्रिया का तीसरा चरण अवशोषण (Absorption) है जिसमें पचे हुए भोज्य पदार्थों का अवशोषण होता है। अवशोषण की क्रिया आहार नाल में स्थित रसांकुर जिसमें रक्त तथा लसिका कोशिकाओं का जाल होता है, के द्वारा होता है। प्रक्रिया का चैथा चरण स्वांगीकरण है जिसमें अवशोषित पचे हुए भोज्य पदार्थ कोशिका के जीवद्रव्य में पहुँचकर आत्मसात हो जाता है। प्रक्रिया का अन्तिम चरण मल विसर्जन है जिसमें अपचित भोज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है। भोजन जीवधारियों के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसके द्वारा शरीर को ऊर्जा की आपूर्ति, शरीर की टूटी फूटी कोशिकाओं की मरम्मत का कार्य, शरीर की वृद्धि एवं शरीर की रोगों से रक्षा होती है।

भोजन में कार्बनिक तथा अकार्बनिक भोज्य पदार्थ होते हैं। कार्बनिक भोज्य पदार्थों में प्रमुख कार्बोहाइड्रेट, वसाएं, प्रोटीन्स, विटामिन्स तथा न्यूक्लीक अम्ल, अकार्बनिक भोज्य पदार्थों में खनिज लवण तथा जल आते हैं।

कार्बोहाइड्रेट का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन तथा आॅक्सीजन से होता है। सरल कार्बोहाइडेªट्स के रूप में शर्कराएँ ग्लूकोज, फ्रक्टोज, लैक्ओस आदि प्रमुख हैं। ये गन्ना, चुकन्दर, अंगूर आदि से मिलती हैं। जटिल कार्बोहाइड्रेट के रूप में मण्ड प्रमुख खाद्य पदार्थ हैं। यह आलू, चावल आदि में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

वसाओं का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन तथा आॅक्सीजन के मिलने से होता है। यह मक्खन पनीर दूध तथा घी से प्राप्त होता है।
ग्लूकोस को ’कोशिकीय ईंधन’  (cellular fuel)  कहते हैं।

प्रोटीन्स जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं, जिनका निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन, आॅक्सीजन तथा नाइट्रोजन से होता है। जन्तु प्रोटीन्स मांस, मछली, दूध अण्डा आदि से प्राप्त होती है। वनस्पति प्रोटीनस दाल, गेहूँ, मूँगफली आदि से प्राप्त होता है। प्रोटीन का प्रमुख कार्य टूट-फूट की मरम्मत करना है।

विटामिन्स जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं। शरीर की उपापचयी क्रियाओं के लिए ये आवश्यक हैं। इन्हें वृद्धि कारक भी कहते हैं। इसकी कमी से अपूर्णता रोग  हो जाता है। विटामिन्स की खोज एन0आई0 लूनिन ने की थी। ’फंक’ ने सर्वप्रथम विटामिन शब्द का प्रयोग किया।

मानव शरीर में संश्लेषित होने वाले विटामिन:- सामान्यतः जन्तुओं के शरीर में विटामिनों का संश्लेषण नहीं होता है, लेकिन कुछ विटामिनों का संश्लेषण मानव के शरीर में होता है-

(1) विटामिन D (डी) का संश्लेषण मनुष्य की त्वचा द्वारा सूर्य की पराबैंगनी किरणों से होता है। (2) विटामिन ज्ञ का संश्लेषण भी मनुष्य की आँत के सहजीवी जीवाणुओं द्वारा होता है।

भोजन सामग्री कार्बोहाइड्रेट की %  मात्रा प्रोटीन्स की % मात्रा वसाओं की मात्रा %
1.अनाज 60-80 6-12 बहुत कम
 2. दालें 35-55 20-25 बहुत कम
 3. हरी पत्तीदार सब्जियाँ 3-15 2-6 बहुत कम
 4.अन्य सब्जियाँ 3-15 1-3 2.5-7
5. ताजा फल 5-30 1-3 80-90
 6. दूध 4-6 3-4 2-10
 7.वसाएँ लगभग नहीं लगभग नहीं 3-4
8. मांस मछली अण्डे आदि लगभग नहीं लगभग नहीं 5
9. मेवा, मूँगफली आदि 30-55 8-20 लगभग नहीं
10. मीठी एवं मण्डयुक्त 80-90 5-25 लगभग नहीं

मानव का सन्तुलित आहार :- शरीर की वृद्धि, स्वास्थ्य क्रियाशीलता, उद्यमशीलता, आयु आदि लक्षण हमारे शरीर द्वारा लिए गये पोषक तत्वों की गुणवत्ता तथा मात्रा पर निर्भर करते हैं। हमारे आहार में विभिन्न प्रकार के सभी पोषक पदार्थ ऐसे अनुपात में होने चाहिये कि जिससे हमारे शरीर की विभिनन प्रकार की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। ऐसे आहार को ’सन्तुलित आहार’ कहा जायेगा।

भोजन की उपापचयी उपयोगिता को ऊष्मीय ऊर्जा की इकाईयों में व्यक्त किया जाता है जिन्हें ऊष्मांक कहते हैं।

स्वस्थ आहार :- वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीयों में दैनिक आवश्यकता की लगभग 50% से 60% ऊर्जा की पूर्ति कार्बोहाइड्रेट से, 25% से 30% की पूर्ति वसाओं से तथा 15% ऊर्जा की पूर्ति प्रोटीन्स से होती है। इस प्रकार हमारी भोजन सामग्री में 400 से 500 ग्राम कार्बोहाइड्रेट 60 से 70 ग्राम वसाएं तथा 65 से 75 ग्राम प्रोटीन्स का होना आवश्यक होता है। स्वस्थ सन्तुलित आहार के लिए कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन तथा वसाओं की मात्रा तालिका में दी गयी है।