ध्वनि एवं हिंदी वर्णमाला व वर्णक्रम

11- निम्नलिखित में कौन स्वर नहीं है?

उत्तर : (d) प्रश्नगत विकल्पों में स्वर नहीं है. यह व्यंजन व्यजन है। यह च बर्ग का चतुर्थ व्यजन है|

12-निम्नलिखित में से कौनसा मूल दीर्घ स्वर नहीं है?

उत्तर : (d) स्वतंत्र रूप से उच्चरित वर्ग स्वर कहलाते हैं। हिन्दी वर्णमाला में।। स्वर हैं, जिनका वर्गीकरण निम्न है:
ह्रस्व स्वर– जिन स्वरों की उत्पत्ति दूसरे स्वरों से न होकर स्वतंत्र रूप से होती है, ये हस्व स्वर कहलाते हैं, जैसे- अ, इ, उ, ऋ। इन्हें मूल स्वर भी कहा जाता है।
दीर्घ स्वर– दो समान मूल स्वरों के योग से निर्मित स्वर दीर्घ स्वर कहलाते हैं। ‘आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ ) मूल दीर्घ स्वर है |
संयुक्त स्वर– जब दो असमान स्वर परस्पर जुड़ते हैं, तो उनके योग से संयुक्त स्वरों का निर्माण होता है। ए (अ+इ), ऐ (अ+ए ), ओ (अ+उ ) और औ (अ+ओ) संयुक्त स्वर हैं।

13- निम्न में दीर्घ स्वर है?

उत्तर : (b) दीर्घ स्वर- दो समान मूल स्वरों के योग से निर्मित स्वर दीर्घ स्वर कहलाते हैं। ‘आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ ) मूल दीर्घ स्वर है |

14- निम्न में दीर्घ स्वर है?

उत्तर : (a) दीर्घ स्वर- दो समान मूल स्वरों के योग से निर्मित स्वर दीर्घ स्वर कहलाते हैं। ‘आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ ) मूल दीर्घ स्वर है |

15-निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त स्वर है?

  1. अ, ए,ऋ
  2. अ, ए, ओ
  3. आ, ए. औ
  4.  ए, ऐ, ओ, औ

उत्तर : (d) संयुक्त स्वर- जब दो असमान स्वर परस्पर जुड़ते हैं, तो उनके योग से संयुक्त स्वरों का निर्माण होता है। ए (अ+इ), ऐ (अ+ए ), ओ (अ+उ ) और औ (अ+ओ) संयुक्त स्वर हैं।

16-मात्रा के आधार पर स्वर कितने प्रकार के होते है ?

  1. 2
  2. 3
  3. 4
  4. 5

उत्तर (b): उच्चारण में लगने वाला समय मात्रा   कहलाता। इसी मात्रा के आधार पर स्वरों के तीन भेद हैं-
हस्व स्वर-जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता हैं। इन्हें हस्व स्वर कहते  है, इन्हें एक मात्रिक स्वर भी कहते हैं। अ, इ, उ, ऋ हस्व स्वर है |
दीर्घ स्वर -जिन स्वरों के उच्चारण में दो मात्रा का समय लगता है. वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं। इन्हें ‘द्विमात्रिक स्वर’ भी कहते हैं। वे हैं- आ, ई,ऊ,ए,ऐ ,ओ.औ।
प्लुत स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्रा का मन लगे, उसे ‘प्लुत स्वर‘ कहते हैं। (३) अक इसका चिह्न होता संस्कृत व्याकरण में प्लुत स्वरों की संकल्पना प्राप्त होती है। हिंदी में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है.

17-वर्ण तालिका के अनुसार ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत क्या है?

  1. स्वर
  2. मात्रा
  3. व्यंजन
  4. विसर्ग

उत्तर (a) उच्चारण में लगने वाला समय मात्रा   कहलाता। इसी मात्रा के आधार पर स्वरों के तीन भेद हैं-
हस्व स्वर-जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता हैं। इन्हें हस्व स्वर कहते  है, इन्हें एक मात्रिक स्वर भी कहते हैं। अ, इ, उ, ऋ हस्व स्वर है |
दीर्घ स्वर -जिन स्वरों के उच्चारण में दो मात्रा का समय लगता है. वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं। इन्हें ‘द्विमात्रिक स्वर’ भी कहते हैं। वे हैं- आ, ई,ऊ,ए,ऐ ,ओ.औ।
प्लुत स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्रा का मन लगे, उसे ‘प्लुत स्वर’ कहते हैं। (३) अक इसका चिह्न होता संस्कृत व्याकरण में प्लुत स्वरों की संकल्पना प्राप्त होती है। हिंदी में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है |

18-जिह्वा के आधार पर स्वर कितने प्रकार के होते हैं?

  1. 2
  2. 3
  3. 4
  4. 5

उत्तर (b) जिह्वा के उत्थापित होने या उसकी क्रियाशीलता के आधार पर स्वर 3 प्रकार के होते हैं
(1) अग्र स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का अग्र भाग सक्रिय रहता है, उन्हें ‘अग्र स्वर’ कहते हैं, जैसे – इ, ई, ए.ऐ।
(2) मध्य स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का मध्य भाग क्रियाशील रहता है, उन्हें ‘मध्य स्वर’ कहते हैं, जैसे-अ।
(3) पश्च स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का पिछला भाग उत्थापित होता है, उन्हें ‘पश्च स्वर’ कहते हैं, जैसे- आ,उ, ऊ, ओ, औ।

19- अर्द्ध विवृत स्वर है:

  1.  ऊ
  2.  ऐ

उत्तर (b) : मुखद्वार के खुलने के आधार पर स्वर चार प्रकार होत हैं, जो इस प्रकार हैं
विवृत – जिन स्वरों के उच्चारण में मुखद्वार पूरा खुलता है, जैसे
अर्धे विवृत- जिन स्वरों के उच्चारण में मुखद्वार आधा खुलता है, जैसे- अ, ऐ, ऑ, औ।
अर्ध संवृत- जिन स्वरों के उच्चारण में मुखद्वार आधा बन्द रहता है, जैसे- ए, ओ।
संवृत- जिन स्वरों के उच्चारण में मुखद्वार लगभग बन्द रहता है, जैसे- इ, ई, उ, ऊ।
अतः दिये गये विकल्पों में से ‘ऐ’ अर्ध विवृत स्वर है।

20- जिनकी ध्वनि केवल मुख से निकलती है, वे हैं :

  1. वृत्ताकार स्वर
  2. संवृत स्वर
  3. अनुनासिक स्वर
  4. निरनुनासिक स्वर

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