धान के बीज पर सब्सिडी पाने के लिए 30 जून तक करें रजिस्ट्रेशन

जानें, कैसे करना है आवेदन और क्या देने होंगे दस्ताबेज

गेहूं की फसल की कटाई और विक्रय के बाद किसान खरीफ फसलों की बुवाई के काम में लग जाएंगे। ऐसे कई राज्यों किसान धान की बुवाई करेंगे। जैसा कि धान की बुवाई में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से किसानों को पानी की बचत के लिए धान की सीधी बुवाई करने की सलाह दी जा रही है। हरियाणा सरकार की ओर से राज्य में सीधी बुवाई करने वाले किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों से रजिस्ट्रेशन कराने को भी कहा गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पर रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा किसानों को दी है। सरकार की ओर से इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए अंतिम तिथि का निर्धारण भी कर दिया गया है। राज्य के किसान 30 जून 2022 तक धान की सीधी बुवाई के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। 

सीधी बुवाई करने पर किसानों को मिलेगा 4 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान

हरियाणा सरकार ने इस खरीफ सीजन के लिए एक लाख एकड़ में सीधी बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है। इसको लेकर सरकार की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य सरकार धान की सीधी बुवाई करने वाले किसानों को 4 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान (सब्सिडी) देगी। ये सब्सिडी सीधे किसानों के खातों मेें ट्रांसफर की जाएगी। 

12 जिलों के किसानों को मिलेगी धान की सीधी बुवाई के लिए सब्सिडी

हरियाणा सरकार की ओर से धान की सीधी बुवाई के लिए जिन जिलों का चयन किया गया है उनमें 12 जिलों को शामिल किया गया है। उनमें अंबाला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, सोनीपत, जींद, हिसार, सिरसा, रोहतक और फतेहाबाद के किसानों को शामिल किया गया है। 

धान की सीधी बुवाई से क्या होगा लाभ

धान की सीधी बुवाई करने से किसानों को कम पानी की आवश्यकता होगी। इस विधि से बुवाई करने पर करीब 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है। इस तकनीक से मशीन से सीधे धान की बुवाई की जाती है। इस विधि से बुवाई करने पर नर्सरी से लेकर पौध रोपण तक की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इससे पानी की बचत होती है और किसान का श्रम भी कम लगता है। यह तकनीक उन राज्यों के लिए लाभकारी है जहां पानी का स्तर नीचे जा रहा है। यहां सीधी धान की बुवाई करना ही एक विकल्प है। बता दें कि धान की फसल को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। ये ज्यादा पानी चाहने वाली फसल है और हरियाणा में जल स्तर काफी नीचे चला गया है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से किसानों से कम पानी में धान बुवाई करने के लिए सलाह दी जा रही है। इसके लिए धान की सीधी बुवाई करने पर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। 

मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर किसान कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन

किसान अपनी फसल का ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज करवाने के लिए अपने नजदीकी अटल सेवा केंद्रों अथवा कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा स्वयं भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इस पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया इस प्रकार से है- 

  • सबसे पहले आपको मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट haryana.gov.in  पर जाना होगा।
  • यहां होम पेज पर रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करना होगा।
  • यहां सर्च बॉक्स में अपना फोन नंबर या आधार दर्ज करना होगा।
  • पंजीकरण प्रक्रिया को जारी रखने के लिए, किसान को व्यक्तिगत जानकारी जैसे आवेदन का नाम, आवेदक की जन्म तिथि और निवास स्थान, बैंक शाखा का नाम और आईएफएससी कोड आदि जानकारी भरनी होगी। 
  • इसके बाद फिर पंजीकरण प्रक्रिया जारी रखने के लिए अगला (नेक्सट) पर क्लिक करने के लिए कहा जाएगा।
  • पंजीकरण प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए, किसान को मंडी या आढती का विवरण देना होगा।
  • इस तरह आप मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • फसल का नाम, किस्म और बुवाई का समय मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
  • आधार कार्ड के साथ मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी है। क्योंकि संबंधित जानकारी इसी पर एसएमएस से मिलेगी।
  • जमीन की जानकारी के लिए राजस्व रिकॉर्ड के नकल की कॉपी, खसरा नंबर देखकर भरना होगा।
  • बैंक खाते की एकदम सही जानकारी देनी होगी।

मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज

मेरी फसल मेरा ब्योरा योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होगी जो इस प्रकार से हैं-

  • आवेदन करने वाले किसान का आधार कार्ड
  • परिवार पहचान-पत्र
  • मूल निवास प्रमाण-पत्र
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर
  • जमीन के कागजात (खसरा खतौनी की कॉपी)
  • पासपोर्ट साइज फोटो  

किसानों की आजीविका पूरी तरह से खेतीबाड़ी पर निर्भर होती है. खेतीबाड़ी से ही किसान भाई अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. वहीं किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सरकार भी विभिन्न सरकारी योजनाओं को संचालित कर अपना योगदान देती रहती है, ताकि किसानों को खेतीबाड़ी से सम्बंधित किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े.  

इसी क्रम में झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिले के किसानों को राज्य सरकार की तरफ से धान के बीज पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है. जिसका लाभ जिले के किसान भाई उठा रहे हैं. वहीँ धान के बीज पर मिलने वाला अनुदान का लाभ उठाने के लिए, कृषि वैज्ञानिकों ने स्थानीय किसानों को प्रखंड कृषि पदाधिकारी, जनसेवक, बीटीएम, एटीएम, कृषक मित्रों से जल्द से जल्द आवेदन करने की मांग भी की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सेन्हा प्रखंड कृषि कार्यालय से किसान भाई धान की बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान का लाभ उठा सकते हैं.

इसी बीच बीटीएम रमन कुमार ने किसानों को अनुदान के लिए पंजीकरण करवाने की सलाह देते हुए कहा कि किसान अपने-अपने क्षेत्र के कृषक मित्र एवं जनसेवक से संपर्क कर धान के बीज पर अनुदान पाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाएं.

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कितना अनुदान (Subsidy)

किसानों को अपनी फसल से अधिक से अधिक लाभ मिले और उनकी आय में वृद्धि हो इसके लिए राज्य सरकार किसानों को अनुदान पर बीज उपलब्ध करवा रही है. जिसमें किसानों को करीब 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है.

धान की किन किस्मों पर मिल रहा अनुदान (On Which Varieties Of Paddy, Subsidy Is Being Given)

सरकार की तरफ से हाइब्रिड और और प्रमाणित धान के बीजों पर किसानों को अनुदान राशि की सहायता राशि प्रदान की जा रही है.

मिटटी की जाँच करें (Soil Testing )

इसके अलावा किसानों को धान के बीज की बुवाई के उपरांत कृषि वैज्ञानिकों  ने मिट्टी जाँच करवाने की की भी सलाह दी है. ऐसा करने से किसानों को धान की फसल पैदावार अच्छी मिलेगी, साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा.  

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