Revolts Against British Empire- Revolt Of 1875

ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध विद्रोह (Revolts Against British Empire) 1857 का विद्रोह (Revolt of 1857) भारत के इतिहास में 1857 का विद्रोह एक युगांतकारी घटना मानी जाती है। सन् 1757 की प्लासी की लड़ाई और 1857 के विद्रोह के बीच ब्रिटिश शासन ने अपने 100 वर्ष पूरे कर लिये थे। इन 100 वर्षों में कई

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Drain of Wealth From India

धन का बहिर्गमन (Drain of Wealth) इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उपर्युक्त सभी व्यवस्थाओं के मूल में कम्पनी की वाणिज्य वादी प्रकृति व्याप्त थी। धन की निकासी की अवधारणा वाणिज्यवादी सोच के क्रम में विकसित हुई। अन्य शब्दों में, वाणिज्यवादी व्यवस्था के अतंर्गत धन की निकासी (Drain of Wealth)उसस्थिति को कहाजाता

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British Land Revenue System in India

भारत में अंग्रेजों की भू-राजस्व व्यवस्था (British Land Revenue System in India),स्थायी भू-राजसव व्यवस्था (इस्तमरारी बंदोबस्त)(Permanent Land Revenue System) :- कंपनी के अंतर्गत बंगाल में भू-राजस्व (Revenue System)के निर्धारण का प्रश्न खड़ा हुआ, जब ब्रिटिश कंपनी को बंगाल की दीवानी प्राप्त हुई। आरम्भ में लाॅर्ड क्लाइव ने भारतीय अधिकारियों के माध्यम से ही भू-राजस्व की

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सहायक संधि प्रणाली और उससे भारत की दशा

सहायक संधि प्रणाली और भारत पर इसका प्रभाव साम्राज्यवादी विचारधारा का पोषक लार्ड बेलेजली1798 में भारत का गर्वनर जनरल बना। उसके पद प्राप्ति के समय भारत की राजनीतिक स्थिति अत्यंत संकट पूर्ण थी। शोर की अहस्तक्षेप की नीति के कारण कम्पनी कई खतरों से घिरी थी। यूरोप में हो रही फ्रांसीसी क्रांति से परिस्थितियां गम्भीर

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औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था, व्यपगत का सिद्धात

औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था से तात्पर्य है कि किसी दूसरे देश की अर्थव्यवस्था का उपयोग अपने हित के लिए प्रयोग करना। भारत में औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था की शुरुआत 1757 ई0 में प्लासी युद्ध से हुई, जो विभिन्न चरणों में अपने बदलते स्वरूप के साथ स्वतंत्रता प्राप्ति तक चलती रही। भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था के बारे

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Company of the British, Duch, France

भारत में अंग्रेजों की कम्पनी की स्थापना (Establishment of the British company in India) 31 दिसम्बर 1600 को ब्रिटेन की महारानी एलिजावेथ प्रथम ने एक अंग्रेज कम्पनी को 15 वर्ष के लिए पूर्व के साथ व्यापार करने की अनुमति प्रदान की। इस कम्पनी का प्रारम्भिक नाम The Governer and Company of Marchants of Landon Trading into

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Arrival of European Companies in India

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) यूरोप के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध बहुत पुराने, यूनानियों के जमाने से है। भारत-यूरोपीय व्यापारिक मार्ग जहां से भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) हुआ | प्रायः तीन मार्गो से यूरोपीय देशों के साथ व्यापार होता

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