थियोसोफिकल सोसायटी & सैयद अहमद खान तथा अलीगढ़ आंदोलन

थियोसोफिकल सोसायटी थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना संयुक्त राज्य अमरीका में मैडम एच.पी. ब्लावात्सकी तथा कर्नल एच.एस. ओलकाट द्वारा की गई। बाद में दोनों भारत आ गए तथा 1886 में मद्रास के करीब अडियार में उन्होंने सोसायटी का मुख्यालय स्थापित किया। वर्ष 1893 में भारत आने वाली श्रीमती एनी बेसेंट के नेतृत्व में थियोसोफिस्ट आन्दोलन जल्द

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पुर्नजागरण आन्दोलन और समाज सुधार आन्दोलन -2

डेरोजिओं और यंग बंगाल:- उन्नीसवीं सदी के तीसरे दशक के अंतिम वर्षों तथा चैथे दशक के दौरान बंगाली बुद्धिजीवियों के बीच एक आमूल परिवर्तनकारी प्रवृत्ति पैदा हुई। यह प्रवृत्ति राममोहन राय की अपेक्षा अधिक आधुनिक थी और उसे यंग बंगाल आंदोलन के नाम से जाना जाता है। उसका नेता और प्रेरक नौजवान एंग्लो इंउियन हेनरी

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Indian Governor General From 1936-48

1936-44:-वाइसराय और गवर्नर जनरल लार्ड लिनलिथगो भारत में नियुक्त अंग्रेज गवर्नर जनरलों में इनका कार्यकाल सबसे लम्बा था। सविनय अवज्ञा आन्दोलन की समाप्ति और कांग्रेस द्वारा आधिकारिक रूप से मई 1934 में इस आन्दालन को वापस लेने के बाद अधिकाधिक कांग्रेसजन 1935 के अधिनियम में प्रस्तावित विधायिकों में प्रवेश करने के इच्छुक थे। इस नवीन

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Indian Governor General From 1921-1936

1921-26 वाइस और गवर्नर जनरल लार्ड रीडिंग वह एक ऐेसे नाजुक समय में भारत आया था जब गांधीवादी नणनीति ने भारतीय राजनीति में एक नए युक का सूत्रपात किया था। नवम्बर 1921 में जब प्रिंस आॅफ वेल्स का भारत में आगमन हुआ, तो देशव्यापी हड़ताल ने उनका स्वागत किया। इस घटना और प्रथम गांधीवादी आन्दोन

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Indian Governor General From 1899-1921

1899-1905 वाइसराय और गवर्नर जनरल लाॅर्ड कर्जन संभवतः किसी भी अन्य ब्रिटिश गवर्नर जनरल के विरूद्ध भारतीय लोगों के मन में इतनी अधिक उग्र घृणा ओर दुर्भावना जागृत नहीं हुई। जिनकी कर्जन के विरूद्ध हुई।वह भारत क प्रति ब्रिटिश साम्राज्यवाी नीतियों का नग्न प्रतीक था।जब उसने भारत में वाइसराय के रूप में पदभार ग्रहण किया

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भारत के गवर्नर जनरल (Indian Governor General) Up To 1848-99

1876-80 वाइसराय एवं गवर्नर जनरल लार्ड लिटन वह ब्रिटेन में बेजामिन डिज़रायली की कंजर्वेटिव सरकार का भारत में प्रतिनिधि था। लिटन एक प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार और लेखकार होने के बावजूद भारतीय मामलों में बहुत प्रतिक्रिया वादी औरदमनशील था व भारतीय भाषा प्रेस अधिनियम, शस्त अधिनियम आदि जैसे प्रतिक्रियावादी कानूनों को पारित करने के लिए उत्तरदायी

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भारत के गवर्नर जनरल (Indian Governor General) Up To 1848-76.

1848-56- गवर्नर जनरल लाॅर्ड डलहौजी:- भारत का महानतम गवर्नर जनरल माना जाता है। भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार एवं उसको शक्तिशाली बनाने में उनका अपरिमित योगदान था। भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का जितना अधिक विस्तार डलहौजी के शासनकाल में हुआ, उसका आधा भी किसी अन्य गवर्नर जनरल के कार्याकाल में नहीं हुआ। उसके द्वारा

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भारत के गवर्नर जनरल (Indian Governor General)

भारत के गवर्नर जनरल (Indian Governor General) 1772-85:- वरेन हेस्टिंग्ज-बंगाल का गर्वनर (1772) और गर्वनर जनरल (1773-85) के रूप में। बंगाल में द्वैध प्रशासन व्यवस्था का अंत और बंगाल,बिहार व उड़ीसा को कम्पनी के सीधे प्रशासन के अंतर्गत लाया गया, जिसके परिणामस्वरूप ईस्ट इण्डिया कम्पनी का एक राजनीतिक शक्ति के रूप मे भारत में उदय।

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Indian Mass Movements

अन्य जन-आंदोलन (Indian Mass Movements) यदि आंदोलन और विद्रोहों की क्रमबद्धता का विश्लेषण किया जाए तो प्लासी के युद्ध (1757) और 1857 के विद्रोह के बीच ऐसे अनेक विद्रोह एवं आंदोलन हुए जिनमें किसानों, शासकों, सैनिकों, जमींदारों, साधुओं और अपदस्थ भारतीय शासकों ने भाग लिया। इनमें से अधिकांश विद्रोहियों का संबंध निम्न वर्ग से था।

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विद्रोह की विफलता के कारण (Causes for the Failure of the Revolt)

सन् 1857 के विद्रोह की विफलता का विश्लेषण करने पर हमें निम्नलिखित कारण दिखाई पड़ते हैं- यह विद्रोह स्थानीय, सीमित तथा असंगठित था। बिना किसी पूर्व योजना के शुरू होने के कारण यह विद्रोह अखिल भारतीय स्वरूप धारण नहीं कर सका और भारत के कुछ ही वर्गों तक सीमित रहा। देखा जाए तो विद्रोह की

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