सल्तनत कालीन स्थापत्य कला

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला     भारत और तुर्कों के आपसी मिलन से स्थापत्य के क्षेत्र में एक नयी शैली का उदय हुआ जिसे इन्डो-इस्लामिक शैली कहा जाता है। इस शैली की प्रमुख विशिष्टता मेहराब एवं गुम्बद का प्रयोग है। इस शिल्प को अरबों ने रोम से ग्रहण किया था। मेहराबों एवं गुम्बदों के निर्माण से

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दिल्ली सल्तनत प्रशासन,प्रमुख ऐतिहासिक कृतियां

दिल्ली सल्तनत प्रशासन प्रशासन:-दिल्ली सल्तनत का प्रशासन अरबी-फारसी पद्धति पर आधारित थी। इस प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा या सुल्तान था। यह सुल्तान खुदा के नाम पर शासन करता था। जबकि वास्तविक सत्ता सुन्नी भातृत्व भासना अथवा मिल्लत में निहित थी। चूँकि मुस्लिम शासन पद्धति धार्मिक पुस्तक कुरान पर आधारित थी और मुस्लिम जगत में

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विजय नगर साम्राज्य

विजय नगर साम्राज्य स्थापना:-1336 ई0 (आधुनिक कर्नाटक में) राजधानी:-विजय नगर (आधुनिक हम्पी) प्रारम्भिक राजधानी:- अनेगुण्डी दुर्ग। संस्थापक:- विजय नगर साम्राज्य के संस्थापक हरिहर और बुक्का द्वारा तुंगभद्रा नदी के दक्षिण में। मुहम्मद तुगलक के शासन काल में। मुहम्मद तुगलक के समय में दिल्ली सल्तनत का सर्वाधिक विस्तार हुआ। परन्तु उसे दक्षिण भारत में सबसे अधिक

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तुगलकवंश (1320-25 ई0),सैयद वंश (1414-50)

तुगलकवंश (1320-25 ई0) गयासुद्दीन तुगलक यह दिल्ली सल्तनत का पहला शासक था जिसने अपने नाम के पहले गाजी शब्द लगाया, दिल्ली की गद्दी पर बैठते ही इसने बाजार नियंत्रक नीति को समाप्त कर दिया, इसके काल की प्रमुख घटना निम्नलिखित थी। (1) इसके काल में डाक व्यवस्था को पूर्ण रूप में सुसंगठित किया, हलांकि इसे

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खिलजी वंश

 खिलजी वंश(1290-1320) खिलजी द्वारा सत्ता स्थापित करने को क्रांति कहा जाता है। हलांकि इतिहासकारों में इस बात को लेकर मतभेद है कि खिलजी तुर्क थे या नही समकालीन इतिहासकार बरनी अपनी पुस्तक तारीखे फिरोजशाही में इन्हे तुर्क नही मानता लेकिन ऐसा माना जाता है कि तुर्कों की कुल 64 जातियों में से एक भारत आने

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दिल्ली सल्तनत,महमूद गजनवी,गोरी वंश,रजिया ,बलबन

दिल्ली सल्तनत ईस्लाम का उदय:- इस्लाम धर्म का उदय छठी शताब्दी में हुआ इसका श्रेय मोहम्मद साहब को दिया जाता है। मुहम्मद साहब (570-632 ई0) पिता का नाम-अब्दुल्ला         माता का नाम-अमीना जन्म-570 मक्का में  पत्नी का नाम-खदीजा परवरिश-चाचा अबू जान मुहम्मद साहब 622 ई0 में मक्का से मदीना चले गये इसे हिजरत कहा गया।

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दिल्ली तथा अजमेर के चैहान,चंदेल वंश (बुन्देल खण्ड),परमार वंश,कलचुरिवंश,सेनवंश

दिल्ली तथा अजमेर के चैहान संस्थापक:- वासुदेव (सातवीं शताब्दी)  राजधानी– शाकंभरी (अजमेर) एवं दिल्ली चैहान ने अपना मूल केन्द्र अजमेर व दिल्ली को बनाया लेकिन बाद में उन्होंने अपनी राजधानी दिल्ली में ही स्थानान्तरित कर ली। अजमेर:– इसका प्रारम्भिक नाम शाकंभरी था। अजयराज नामक शासक ने अजमेर की स्थापना की। दिल्लीः-दिल्ली का प्राचीनतम नाम योगिनीपुरम

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राजपूत युग,प्रतिहार वंश,राष्ट्रकूट वंश,पालवंश

राजपूत युग (7 या 8वीं शताब्दी)     राजपूत शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कर्नल टाड़ ने आठवीं शताब्दी में लिखी एक पुस्तक Annals and History Rajsthan  में किया है। राजपूत शब्द एक जाति के रूप में अरब आक्रमण के बाद ही प्रचलित हुआ। भारतीय इतिहास में 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का काल राजपूत काल

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भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय

भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:- बंगाल का प्रथम गर्वनर-क्लाइव। आत्महत्या करने वाला प्रथम गर्वनर-क्लाइव। महाभियोग का सामना करने वाला गर्वनर जनरल-वारेन हेस्टिंग्स। बंगाल का प्रथम गर्वनर जनरल-वारेन हेस्टिंग्स। वह गर्वनर जनरल जिसकी मजार गाजीपुर में है- कार्नवालिस। 1833 के अधिनियम के द्वारा भारत का प्रथम गर्वनर जनरल -लाॅर्ड विलियम बैंटिंग ब्रिटिश

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भारत पर अरबों का आक्रमण: ऐतिहासिक महत्व,तुर्को का आगमन

भारत पर अरबों का आक्रमण: ऐतिहासिक महत्व भारत और अरब के बीच 7वीं सदी में ही संपर्क आरंभ हो गये थे। लेकिन राजनीतिक संबंध 712 ई0 में सिंध पर आक्रमण के दौरान स्थापित हुआ। भारत में अरबों के आगमन का राजनीतिक दृष्टि से उतना महत्व नहीं है, जितना अन्य पक्षों का है। अरब आक्रमणकारी भारत

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