प्रतिरोधक भण्डार (वफर स्टाॅक)

प्रतिरोधक भण्डार (वफर स्टाॅक) वफर स्टाक बनाने का एक मात्र उद्देश्य खाद्य सुरक्षा प्रदान करना होता है यह एक ऐसा प्रारम्भिक स्टाॅक है जिसके फसल खराब होने की स्थिति में अनाज निकाला जाता है। सन् 1994 ई0 के बाद से स्टाॅक प्रत्येक तिमाही के लिए अलग-अलग निर्धारित किया जा रहा है। यदि स्टाॅक वर्ष भी

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किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC)

किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) कृषकों को संगठित बैंकिंग प्रणाली तथा कम खर्चीले तरीके से पर्याप्त और यथा समय ऋण सहायता प्रदान करने के लिए अगस्त 1998 ई0 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना चलाई गयी। इस योजना का कार्यान्वयन वाणिज्यिक बैंको, केन्द्रीय सहकारी बैंको और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से किया जा रहा है।

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बीजों का वर्गीकरण फसलचक्र

 बीजों का वर्गीकरण 1. प्रजनक बीज (Breeders Seeds) :- प्रजनक बीज, पादप या जिस संस्था द्वारा पैदा किया जाता है उससे सीधा सम्बन्धित होता है इसमें सबसे अधिक शुद्धता पायी जाती है। [adToappeareHere] आधार बीज (Foundation Seeds) :- ये बीज प्रजनक बीजों से तैयार किये जाते है इनमें विशेष मानकों के आधार पर आंनुवशिक गुण

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भारतीय कृषि

भारतीय कृषि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के आधार के रूप में जानी जाती है। पिछले कुछ दशकों से कृषि नीति खाद्यान्न उत्पादन में स्व- पर्याप्तता तथा निर्भरता की रही है खाद्यान्न उत्पादन जो सन् 1951-52 में मात्र 52 मिलियन टन था वह 2013-14 में बढ़कर 254.8 मिलियन टन हो गया। 12वीं पंचवर्षीय योजना के प्रथम तीन

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भारत में नियोजन (Planning in India)राष्ट्रीय विकास परिषद एवं योजना

भारत में नियोजन (Planning in India) भारत में आयोजन से अभिप्राय राज्य के अभिकरणों के द्वारा देश की आर्थिक सम्पदा और सेवाओं के एक निश्चित समय हेतु आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना है। वर्तमान परिस्थिति में कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की अवधारणा में नियोजन के द्वारा समाज को विकसित करने का लक्ष्य रखा जाता है और

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भारत में बेरोजगारी की समस्या

भारत में बेरोजगारी की समस्या (Problem of Unemployment In India) . सामान्य रूप से बेरोजगारी का आशय उत्पादन कार्य में न लगा होना है। बेरोजगारी की समस्या एक सामान्य समस्या है जो विकसित या अल्प विकसित सभी प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में पायी जाती है। [adToappeareHere] परम्परावादी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पूर्ण रोजगार एक सामान्य

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राष्ट्रीय आय (National Income)

राष्ट्रीय आय (National Income) राष्ट्रीय आय से तात्पर्य किसी देश की अर्थव्यवस्था द्वारा पूरे वर्ष के दौरान उत्पादित अन्तिम वस्तुओं व सेवाओं के शुद्ध मूल्य के योग से होता है, इसमें विदेशों से अर्जित शुद्ध आय भी शामिल होती है।  मार्शल के अनुसार-’’किसी देश की श्रम एवं पूंजी उस देश के प्राकृतिक संसाधनों के साथ

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आर्थिक संवृद्धि एवं विकास

आर्थिक संवृद्धि एवं विकास (Economic Growth And Development) निश्चित समयावधि में किसी अर्थव्यवस्था में होने वाली वास्तविक आय की वृद्धि, आर्थिक समृद्धि है। यह एक भौतिक अवधारणा है। यदि, राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पाद तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही है, तो माना जाता है कि आर्थिक संवृद्धि हो रही है। आर्थिक विकास

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एक परिचय ,अर्थव्यवस्था के प्रकार

एक परिचय (Introduction)  एक परिचय मनुष्य की समस्त आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन और विश्लेषण करने वाली विधा अर्थशास्त्र कहलाती है। अर्थशास्त्र का व्यवहारिक पक्ष अर्थव्यवस्था है। अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसकी सहायता से देश में उपलब्ध संसाधनों का दोहन और नये संसाधनों का निर्माण किया जाता है। अर्थव्यवस्था के माध्यम से असीमित आवश्यकता और

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