अन्तःस्रावी तन्त्र Endocrine System

अन्तःस्रावी तन्त्र Endocrine System अन्तःस्रावी अंगों अथवा वाहिनीहीन ग्रन्थियों को अन्तःस्रावी तन्त्र के अन्तर्गत रखा गया है क्योंकि इनसे उत्पन्न स्राव अथवा हार्मोन ग्रन्थि से बाहर वाहिनी द्वारा नहीं जाते अपितु सीधे इन अंगों में प्रवाहित रक्त में जाते हैं। हार्मोन का वितरण रुधिर द्वारा होता है। हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक भी होते हैं। रासायनिक रूप

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तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System)

तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System)   शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं का नियन्त्रण एवं नियमन तन्त्रिका तंत्र द्वारा होता है। तन्त्रिका कोशिकाएँ उत्तेजनशीलता तथा संवाहकता के लिए उत्तरदायी हैं। तन्त्रिका कोशिकाएँ शरीर की अत्यधिक जटिल और सबसे लम्बी कोशिकाएँ होती हैं जिनकी उत्पत्ति भ्रूण की एक्टोडर्म से होती है। एक तन्त्रिका कोशिका से निकलने वाले

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हृदय सम्बन्धी रोग

हृदय सम्बन्धी रोग हृदयावरण शोथ(Pericarditis) :-  इस दशा में हृदय को ढकने वाली झिल्ली में सूजन आ जाती है और हृदयावरण कोश (pericardium) में तरल एकत्रित हो जाता है। फलस्वरूप हृदय की मुक्त गति नहीं हो पाती। हृदयावरण (पेरिकार्डियम) धीरे-धीरे मोटा और कठोर हो जाता है तथा हृदय को कसने लगता है, इस कारण हृदय

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परिसंचरण तन्त्र Circulatory System

परिसंचरण तन्त्र Circulatory System परिसंचरण तन्त्र में हृदय रक्तवाहिकाएँ तथा लसिका वाहिनियों को सम्मिलित किया जाता है। हृदय एक विशाल पम्प के रूप में कार्य करता है तथा रक्त को सम्पूर्ण शरीर में प्रवाहित करता है। धमनियाँ शुद्ध रक्त को हृदय से शरीर में ले जाती है और शिराएँ अशुद्ध रक्त को शरीर से हृदय

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कोशिका श्वसन Cellular Respiration 

 कोशिका श्वसन (Cellular Respiration ) कोशिकीय आॅक्सीकरण की प्रक्रिया को कोशिकीय श्वसन कहते हैं। इसके तीन प्रमुख चरण हैं- (1) ग्लाइकोलासिस :- इसमें ऑक्सीजन का उपयोग नहीं होता वरन् कुछ ऊर्जा अवश्य मुक्त होती है। जीवाणु तथा कुछ जन्तुओं एवं पादपों की कोशिकाएँ इसी विधि से ऊर्जा उत्पादन करती हैं। इसी समय शर्करा का विघटन होता

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श्वसन Respiration

श्वसन (Respiration) कोशिकीय स्तर पर भोज्य पदार्थों के जैवरासायनिक आॅक्सीकरण को श्वसन कहते हैं। इस प्रक्रिया में आॅक्सीजन ग्रहण की जाती है तथा कार्बन डाइ-आॅक्साइड एवं ऊर्जा मुक्त होती है। ऊर्जा जैविक क्रियाओं के काम आती है। जटिल बहुकोशिकीय जन्तुओं में श्वसन प्रक्रिया कई चरणों में सम्पन्न होती हैं। (1) वाह्य श्वसन :- इस प्रक्रिया

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पारिस्थितिकी (ECOLOGY)

पारिस्थितिकी (ECOLOGY) वातावरण एवं समुदाय के पारस्परिक सम्बन्धों के अध्ययन को पारिस्थितिकी कहते हैं। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम हैकेल 1896 ने किया था। उडम ने प्रकृति की संरचना एवं कार्यों के अध्ययन को पारिस्थितिकी कहा है। वातावरण में से सभी कारक आ जाते हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जीव समुदाय को प्रभावित करते

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आर0एन0ए0 की संरचना तथा कार्य

अधिकतर जीवनधारियों R.N.A एक सूत्री होता है। वुन्ड ट्यूमर वायरस तथा रियोवायरस आदि में दो सूत्री आर0एन0ए0 पाया जाता है। आर0एन0ए0 की पाॅलीन्यूक्लियोटाइड्स शृंखला का निर्माण न्यूक्लियोटाइड्स के मिलने से होता है। न्यूक्लियोटाइड्स का निर्माण राइबोज शर्करा अणु, नाइट्रोजन बेस तथा फास्फोरिक अम्ल अणु से होता है। आर0एन0ए0 अधिकतर आनुवांशिक सूचनावाहक होता है और प्रोटीन

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आनुवांषिक अणु-डी0एन0ए0 (GENETIC MOLECULE-DNA)

आनुवांषिक अणु-डी0एन0ए0 (GENETIC MOLECULE-DNA) जीवों के वे सब लक्षण जो इनकी एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में जाती हैं, आनुवांशिकी लक्षण कहलाते हैं। आनुवांशिकी लक्षणों के एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में जाने की प्रक्रिया को आनुवांशिकता या वंशागति कहते हैं। नर एवं मादा लैंगिक कोशिकाएॅ युग्मक कोशिकाएॅ अथवा गैपीट्स कहलाते हैं। प्रजनन में एक नर

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मनुष्यों में रूधिर वर्ग Blood group humans

कार्ल लैण्डस्टीनर ने यह बताया कि मनुष्यों  में रूधिर सबका समान नहीं होता। मानव के लाल रूधिराणुओं की कोशिकाकला में रूधिर के प्लाज्मा में रूधिराणुओं के अभिश्लेषण से सम्बन्धित प्रोटीन पदार्थ होते हैं। लाल रूधिराणुओं में ऐसे पदार्थों को प्रतिजन या एंटीजेन्स या एग्लूटीनोजेन्स तथा प्लाज्मा में उपस्थित पदार्थों को प्रतिरक्षी या एंटीबाडीज कहते हैं।

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