गुप्तोत्तर काल (Submit Gupta Age)

गुप्तोत्तर काल (Post Gupta Age)   छठी शताब्दी के मध्य अर्थात् 550 ई0 के लगभग गुप्त साम्राज्य के विखंडन के बाद एक बार पुनः भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में विकेन्द्रीकरण और विभाजन की प्रवृत्तियाँ सक्रिय हो उठीं। इस काल में अनेक सामंतों एवं शासकों ने अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी और स्वतंत्र राजवंशों की स्थापना की।

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गुप्त साम्राज्य के अन्तर्गत प्रशासन,अर्थव्यवस्था,साहित्य,कला,धार्मिक जीवन.

Table of Contents गुप्त साम्राज्य के अन्तर्गत प्रशासन (Administration Under Gupta Dynasty) : गुप्तकालीन शासकों ने एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया था। पाटलिपुत्र इस विशाल साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्त शासकों ने उन क्षेत्रों के प्रशासन में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जहाँ के शासकों ने उनके सामन्तीय आधिपत्य को स्वीकार कर लिया था, किन्तु

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गुप्त साम्राज्य

Table of Contents गुप्त साम्राज्य (Gupta Dynasty)    चैथी सदी ई0 के प्रारम्भ में भारत में कोई बड़ा संगठित राज्य अस्तित्व में नहीं था। यद्यपि कुषाण एवं शक शासकों का शासन चैथी सदी ई0 के प्रारंभिक वर्षों तक जारी रहा, लेकिन उनकी शक्ति काफी कमजोर हो गयी थी और सातवाहन वंश का शासन तृतीय सदी

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मौर्याेत्तरकालीन राजव्यवस्था, समाज एंव अर्थव्यवस्था

Table of Contents मौर्याेत्तरकालीन राजव्यवस्था एवं प्रशासन (Post-Mauryan Polity And Administration) इस काल में अधिकतर छोटे-छोटे राज्य थे। यद्यपि उत्तर में कुषाणों एवं दक्षिण में सातवाहनों ने काफी विस्तृत प्रदेशों पर राज किया किन्तु न तो सातवाहन और न तो कुषाणों के राजनीतिक संगठन में वह केन्द्रीयकरण था जो मौर्य प्रशासन की प्रमुख विशेषता थी।

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मौर्योत्तर काल

मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही भारतीय इतिहास की राजनीतिक एकता कुछ समय के लिए विखंडित हो गई। अब ऐसा कोई राजवंश नहीं था जो हिंदुकुश से लेकर कर्नाटक एवं बंगाल तक आधिपत्य स्थापित कर सके। दक्षिण में स्थानीय शासक स्वतंत्र हो उठे। मगध का स्थान साकल, प्रतिष्ठान, विदिशा आदि कई नगरों ने ले

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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था,कला,समाज,अर्थव्यवस्था एंव पतन

Table of Contents मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था:-      मौर्य साम्राज्य के प्रशासन का स्वरूप केन्द्रीकृत था। अर्थशास्त्र के आधार पर प्रशासन के सभी पहलूओं में राजा का विचार और आदेश सबसे ऊपर था। चाणक्य के अनुसार राज्य के सात अवयव हैं- राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, बल तथा मित्र। इन सप्तांगों में चाणक्य राजा

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मौर्य साम्राज्य-अशोक

अशोक बिंदुसार की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अशोक मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर बैठा। अशोक विश्व इतिहास के उन महानतम सम्राटों में अपना सर्वोपरि स्थान रखता है जिनका नाम सफलतम सम्राटों में है तथा भावी पीढि़याँ जिनका नाम श्रद्धा एवं कृतज्ञता के साथ स्मरण करती हैं।     अशोक के शिलालेखों तथा स्तंभलेखों से अशोक

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मौर्य साम्राज्य-चन्द्रगुप्त मौर्य -बिंदुसार

Table of Contents संस्थानक-चन्द्रगुप्त मौर्य कौटिल्य को भारत का मैकियावली भी कहते हैं। मैकियावली की पुस्तक का नाम The Prince है। यह इटली का था। चन्द्रगुप्त मौर्य का नाम यूनानी लेखकों ने सेन्ड्रोकोट्स के रूप में वर्णित किया है। सेन्ड्रोकोट्स की पहचान चन्द्रगुप्त से करने वाला व्यक्ति विलियम जोन्स था। इस मौर्य साम्राज्य को जानने

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मगध राज्य का उत्कर्ष,हर्यक वंश,शिशुनाग वंश,नन्द वंश

Table of Contents सोलह महाजनपदों में मुख्य प्रतिद्वन्दिता मगध और अवन्ति के बीच में थी इनमें भी अन्तिम विजय मगध को मिली। क्योंकि उसके पास अनेक योग्य शासक (बिम्बिसार, अजातशत्रु आदि) थे। लोहे की खान भी मगध में थी हलाँकि अवन्ति के पास भी लोहे के भण्डार थे। मगध की प्रारम्भिक राजधानी राजगिरि या गिरिब्रज

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16 महाजनपदों का उदय

16 महाजनपदों का उदय (The Arising 16 Mahajanpada) छठी शताब्दी ई0पू0 में उत्तर भारत में 16 महाजनपदों का उदय हुआ। ऋग्वेद के जन उत्तर-वैदिक काल में जनपदों में परिवर्तित हो गये थे, और यही जनपद बुद्ध काल में महाजन पदों में बदल गये। बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय एवं जैन ग्रन्थ भगौती सूत्र में इन 16

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