संघीय कार्यपालिका मन्त्रिपरिषद और प्रधानमन्त्री

संघीय कार्यपालिका मन्त्रिपरिषद और प्रधानमन्त्री  [UNION EXECUTIVE : COUNCIL OF MINISTERS AND PRIME MINISTER]-   संघीय मन्त्रिपरिषद:-मूल संविधान के अनुच्छेद 74 में उपबन्धित है कि ’’राष्ट्रपति को उसके कार्यों के सम्पादन में सहायता एवं परामर्श देने के लिए मन्त्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमन्त्री होगा।’’ सैद्धान्तिक रूप से भारतीय संविधान द्वारा समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में

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संघीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति

संघीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति[UNION EXECUTIVE : PRESIDENT AND VICE-PRESIDENT]     भारतीय संविधान में कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। संघीय कार्यपालिका की  शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी तथा वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं अथवा अधीनस्थ पदाधिकारियों के द्वारा करेगा। इस प्रकार संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति और मन्त्रिपरिषद् होंगे। राष्ट्रपति कार्यपालिका

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केन्द्र-राज्य सम्बन्ध (संविधान)

केन्द्र-राज्य सम्बन्ध- सांविधानिक प्रावधान अनुच्छेद 246:-संसद को सातवीं अनुसूची की सूची 1 में प्रगणित विषयों पर विधि बनाने की शक्ति। अनुच्छेद 248:-अवशिष्ट शक्तियां संसद के पास अनुच्छेद 249:-राज्य सूची के विषय के सम्बन्ध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की शक्ति संसद के पास अनुच्छेद 250:-यदि आपातकाल की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो तो राज्य सूची

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भारतीय संघ व्यवस्था (संविधान)

भारतीय संघ व्यवस्था   भारतीय संघ व्यवस्था के संविधान द्वारा क्षेत्र के आधार पर शक्तियों का जो विभाजन या केन्द्रीकरण किया जाता है उस दृष्टि से दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएं होती हैं: एकात्मक शासन और संघात्मक शासन। भारत क्षेत्र और जनसंख्या की दृष्टि से अत्यधिक विशाल और बहुत अधिक विविधताओं से परिपूर्ण है, ऐसी स्थिति

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राज्य के नीति निदेशक तत्व [DIRECTIVE PRINCIPLES]

राज्य के नीति निदेशक तत्व [DIRECTIVE PRINCIPLES OF STATE POLICY] हमारे संविधान की एक प्रमुख विशेषता नीति निर्देशक तत्व हैं। विश्व के अन्य देशों के संविधानों में आयरलैण्ड के संविधान को छोड़कर अन्य किसी देश के संविधान में इस प्रकार के तत्व नहीं हैं। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संविधान में केवल राज्य के संगठन

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मूल कर्तव्य (भारतीय संविधान)

मूल कर्तव्य 1950 में लागू किए गए भारतीय संविधान में नागरिकों के केवल अधिकारों का ही उल्लेख किया गया था, मूल कर्तव्यों का नहीं। लेकिन 1976 में संविधान में व्यापक संशोधन करते समय यह अनुभव किया गया कि संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का भी उल्लेख किया जाना चाहिए। अतः संविधान के चतुर्थ भाग

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मूल अधिकार ( संविधान )

मूल अधिकार    मूल अधिकारों की आवश्यकता और महत्व:-व्यक्ति और राज्य के आपसी सम्बन्धों की समस्या सदैव से ही बहुत अधिक जटिल रही है और वर्तमान समय की प्रजातन्त्रीय व्यवस्था में इस समस्या ने विशेष महत्व प्राप्त कर लिया है। यदि एक ओर शान्ति तथा व्यवस्था बनाये रखने के लिए नागरिकों के जीवन पर राज्य

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भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship)

भारतीय नागरिकता नागरिकता मनुष्य की उस स्थिति का नाम है, जिसमें मनुष्य को नागरिक का स्तर प्राप्त होता है और नागरिक केवल ऐसे ही व्यक्तियों को कहा जा सकता है जिन्हें राज्य की ओर से सभी राजनीतिक और नागरिक अधिकार प्रदान किये गये हों, और जो उस राज्य के प्रति विशेष भक्ति रखते हों। नागरिक

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संविधान की अनुसूचियां एंव व्यवस्था

संविधान की अनुसूचियां भारतीय संविधान के मूल पाठ में 8 अनुसूचियां थी, लेकिन वर्तमान समय में भारतीय संविधान में 12 अनुसूचियां हैं।  अग्र वर्तमान में संविधान की अनुसूचियां प्रकार है: प्रथम अनुसूची:-इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों का उल्लेख है। द्वितीय अनुसूची:-इसमें भारतीय राज-व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के

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संविधान सभा के स्रोत (Source of Constitution)

संविधान सभा के स्रोत संविधान सभा के स्रोत अन्य देशो से ग्रहण किए गए कुछ प्रमुख प्रावधान  इस प्रकार है – ब्रिटेन :सरकार का संसदीय स्वरुप,एकल नागरिकता,कानून का शासन,विधि निर्माण की प्रक्रिया,संसदीय विशेषाधिकार,सर्वाधिक मत के आधार पर चुनावों मेंजीत का फैसला | अमेरिका : मौलिक अधिकार,संविधान की सर्वोच्चता,स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति,निर्वाचित राष्ट्रपति

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