स्मार्ट कृषि (Smart Farming)

स्मार्ट कृषि (Smart Farming) : कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आजकल स्मार्ट कृषि (Smart Farming) शब्दावली का प्रयोग हो रहा है, जो कि परिशुद्ध कृषि (Precision Farming) का समानार्थी है। इसमें सम्मिलित हैं—वर्धित उत्पादकता (Enhanced Productivity), संवर्धित लोचकता (Improved Resilience) एवं कृषि संबंधी दुष्प्रभावों को कम करना। यही वे तरीके हैं, जिन्हें अमल में

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मरुस्थल रोधन एवं प्रमुख मिशन

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार विश्व के प्रायः हर भाग में शुष्क भूमि का तेजी से विस्तार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में विश्व की कुल भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा मरुभूमि है जिसके विस्तार पर यदि रोक न लगाई गई तो अगले 10 वर्षों में यह 56

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अद्यतन कृषि के कुछ महत्वपूर्ण पहलू

राष्ट्रीय बागवानी मिशन : बागवानी उत्पादों में और वृद्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन नामक कार्यक्रम की मई, 2005 में शुरुआत की गयी है। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2011-12 तक देश में बागवानी उत्पादन 300 मिलियन टन तथा बागवानी के अंतर्गत बुवाई क्षेत्र को 40 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित

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कृषि में जैव प्रौद्योगिकी

कृषि में जैव प्रौद्योगिकी, कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का विशेष महत्त्व है। यह कृषि क्षेत्र का वह नवाचार है, जिसके द्वारा हमें ऊतक संवर्धन, भ्रूण संवर्धन एवं पौध प्रवर्धन जैसी विधियां तो प्राप्त हुई ही हैं, ऐसी प्रजातियां भी विकसित की गई हैं, जिनमें हानिकारी दोष कम, लाभकारी गुण ज्यादा हैं। ऊतक संवर्धन (Tissue

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सिंचाई की नवीनतम प्रौद्योगिकियां

ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) : इसे Trickle Irigation भी कहा जाता है। इस प्रणाली में खेत में पाइप लाइन बिछा कर स्थान-स्थान पर नोजल लगाकर सीधे पौधे के जड़ में बूंद-बूंद करके जल पहुंचाया जाता है। छिड़काव सिंचाई (Sprinkling Irrigation) : सिंचाई की इस विधि में पाइपलाइन द्वारा पौधों पर फौव्वारे के रूप में पानी

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प्रमुख कीटनाशी

प्रमुख कीटनाशी : निकोटीन (Nicotine), फेरोमोंस (Phero-mones), कोक्सीमिलिडम (Cocsimilidum), सायरफिड (Sairefid), टाइकोग्रेमा, इपीपाइरोपस आदि। इसके अतिरिक्त न्युक्लियर पॉली, ड्रलवाइरस तथा वियोचेटिना बीविल प्रभावी जैविक नियंत्रक है। प्रमुख कवक नाशक : बार्डोपेस्ट, फाइटोलान, ब्लिमिक्स मिकाप, क्यू-प्रोसान, मरकरी क्लोराइड, एग्रोसान जीएन एरिटान, इर्वेसान, हेक्सेसान, डाइथेन-78, कैण्टान आदि। रोगरोधी एवं संगरोधी फसलें: भारत में विषाणुओं से हो वाले

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उर्वरक (Fertilizer)

उर्वरक (Fertilizer) रासायनिक विधि से कारखानों में तैयार किए गए पादप पोषक तत्वों को उर्वरक कहा जाता है। मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटैशियम को प्राथमिक तत्व माना जाता है। इन्हीं तत्वों की पूर्ति के लिए कृत्रिम खाद (Artificial Manures) का निर्माण किया जाता है जिसे उर्वरक कहा जाता

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उर्वरक (Fertilizer)

रासायनिक विधि से कारखानों में तैयार किए गए पादप पोषक तत्वों को उर्वरक कहा जाता है। मदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटैशियम को प्राथमिक तत्व माना जाता है। इन्हीं तत्वों की पूर्ति के लिए कृत्रिम खाद (Artificial Manures) का निर्माण किया जाता है जिसे उर्वरक कहा जाता है। भूमि

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बीज एवं बीज प्रौद्योगिकी

1960 के दशक में मैक्सिको से आयातित गेहूं के उन्नत बीज लार्मा रोजा (Larma Roja) का भारतीय वैज्ञानिकों ने देशी किस्म सोनेरा (Sonera) के साथ क्रास कराकर सोनेरा-64 नामक अधिक उत्पादन देने वाली किस्म का विकास किया। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत में इस बीज का बड़ा योगदान था। धान की प्रजातियों में भी

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खेती करने की वैज्ञानिक विधियां

निगमित खेती (Corporate Farming) : राष्ट्रीय किसान आयोग ने इस प्रकार की खेती की संस्तुति अपनी रिपोर्ट में की है। निगमित खेती में खेती की व्यवस्था निगम द्वारा की जाती है। भारतीय राज्य फार्स निगम लिमिटेड कुछ राज्यों में निगमित खेती का प्रबंधन करता है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों के कुछ क्षेत्रों में इस प्रकार

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