लोदी वंश

लोदी वंश

संस्थापक-बहलोल लोदी
    लोदी अफगानी थे पहली बार दिल्ली सल्तनत पर अफगानों का शासन स्थापित हुआ।

बहलोल लोदी (1454-89)

   पूरे दिल्ली सल्तनत में बहलोल लोदी ने सबसे अधिक समय तक शासन किया। इसकी महत्वपूर्ण सफलता जौनपुर को दिल्ली राज्य में मिलाने की थी। यह अपने सरदारों के खड़े रहने पर खुद भी खड़ा रहता था। और उनके साथ बैठ कर ही बात-चीत करता था। प्रसिद्ध इतिहासकार डा0 आर0पी0 त्रिपाठी ने लिखा है कि लोदियों का राजतत्व सिद्धान्त संघवाद एवं भाइचारे (अफगानियों के) पर आधारित था।

सिकन्दर लोदी (1489-1517)

    इसकी माँ एक हिन्दू सुनार बीबी नामक महिला थी। इसकी प्रारम्भिक नाम निजाम खाँ था। इसका राज्याभिषेक दिल्ली के पास जलाली में हुआ था। यह गुलरुख नाम से कविताएं लिखता था।
आगरा की स्थापना:-सिंकन्दर लोदी ने 1506 ई0 एक नये शहर आगरा की स्थापना की और उसे अपनी राजधानी बनाया। इसका मूल कारण पूर्वी राजस्थान पर नियंत्रण एवं गुजरात तथा मालवा के प्रमुख बन्दरगाहों तक पहुँचने के लिए सुलभ रास्ते की खोज था।
धार्मिक नीति:-फिरोज तुगलक के बाद यह दूसरा सबसे धर्मन्ध शासक था। इसने मुसलमानों को ताजिया निकलने एवं मुसलमान स्त्रियों के पीरो एवं सन्तों के मजारों पर जाने पर रोक लगा दिया।
भू-राजस्व:-सिकन्दर लोदी दूसरा सुल्तान था जिसने भूमि की माप कराई और सीधे किसानों से भू-राजस्व वसूल किया। भूमि की माप के लिए एक प्रमाणिक पैमाना गजे सिकन्दरी का प्रचलन करवाया। इसकी भू-राजस्व विधि शेरशाह की भू-राजस्व व्यवस्था का आधार बनी।    
    सिकन्दर लोदी अनाज पर से चुंगी माफ कर दिया।
फरहगे सिकन्दी या तिब्बे सिंकदरी-यह संस्कृत की पुस्तकों की पुस्तकों का फारसी में अनुवाद है यह अनुवाद इसके वजीर मियाँ भुआ द्वारा किया गया। इसका विषय आयुर्वेद है।
न्याय प्रियता:-सिकन्दर लोदी की न्याय प्रियता बहुत ही प्रसिद्ध है।
    सिकन्दर लोदी की मृत्यु गले में बीमारी की वजह से हुई।

इब्राहिम लोदी 1517-26)

    यह लोदी वंश का अन्तिम शासक था इसे 1518 ई0 में राणा सांगा ने खतौली की लड़ाई में पराजित किया। जबकि बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में 21 अप्रैल 1526 को पराजित कर इसे मार डाला और आगरा तथा दिल्ली की गद्दी पर अधिकार कर लिया।

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